उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को जिम के मालिक दीपक कुमार को चेतावनी दी है कि वे एक मुस्लिम दुकानदार, वकील अहमद, के खिलाफ विवाद को ‘संवेदनशील’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ कथित बजरंग दल के सदस्यों ने वकील अहमद के प्रतिष्ठान में ‘बाबा’ शब्द के उपयोग पर आपत्ति जताई थी।
जस्टिस राकेश थापलियाल की अध्यक्षता में सुनवाई के दौरान, दीपक कुमार ने अपनी याचिका में पुलिस सुरक्षा की मांग की थी और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की भी गुहार लगाई थी। कुमार का तर्क था कि पुलिस ने नफरत अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफलता दिखाई है।
जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी को एक समूह ने वकील अहमद की दुकान के बाहर जमा होकर उनके खिलाफ नारेबाजी की। इस समूह में शामिल दो व्यक्तियों ने बाद में दीपक कुमार और विजय रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। यह शिकायत बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों द्वारा की गई थी, जो हिंदुत्व से संबंधित संगठनों का हिस्सा हैं।
एफआईआर दर्ज होने के बाद, लगभग 40 लोगों का एक समूह कुमार के जिम के पास इकट्ठा हुआ और उनके खिलाफ नारेबाजी की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जिम मालिक ने विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसके बाद उन पर दबाव बढ़ा।
इस मामले ने उत्तराखंड में धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता के मुद्दों को फिर से उभारा है। जबकि दीपक कुमार ने अपनी सुरक्षा की मांग की है, हाईकोर्ट ने उनके प्रयासों को ‘संवेदनशीलता’ के रूप में देखा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में आगे कोई कार्रवाई होती है और क्या पुलिस अपनी भूमिका निभाने में सक्षम होती है।