10 नवंबर 2022, ये वो तारीख थी जब रविवार से पहले टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को हार का मुंह देखना पड़ा था.
इसके बाद टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप में लगातार 12 मैचों में जीत दर्ज की. इस दौरान टीम इंडिया ने 2024 में 17 साल के लंबे इंतजार के बाद टी20 वर्ल्ड कप का ख़िताब दोबारा जीता था.
लेकिन 22 फ़रवरी को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ टीम इंडिया ने इतना खराब खेल दिखाया कि टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में रनों के हिसाब से उसके हिस्से सबसे बड़ी हार आई.
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में सुपर-8 के तीसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत के सामने जीत के लिए 20 ओवर में 188 रन का लक्ष्य रखा था.
लेकिन होम ग्राउंड पर करीब 90 हजार दर्शकों के सामने टीम इंडिया 18.5 ओवर्स में 111 रन बनाकर ऑलआउट हो गई और उसके हिस्से 76 रन से हार आई.
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैच के बाद स्वीकार किया कि उनकी टीम तो बल्लेबाजी करते हुए पावरप्ले में ही मुकाबले से बाहर हो गई थी.
इससे पहले टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम को 50 रन से ज्यादा के अंतर के कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा था.
भारतीय टीम ने भले ही ग्रुप स्टेज के सभी चारों मुकाबले जीते, लेकिन अब इस हार ने टीम इंडिया की कई कमियों को ना सिर्फ उजागर कर दिया है बल्कि वो आईना भी दिखाया है जिससे मालूम चलता है फेवरेट के टैग के बावजूद टूर्नामेंट में उसके लिए आगे का सफर आसान नहीं होना वाला है.18, 6, 0, 0, 31, 8, 25, 1, 0 और 0. बीते 10 मैचों में ये वो स्कोर हैं जिन पर टीम इंडिया ने अपना पहला विकेट गंवाया है.
मतलब ये हुआ कि ओपनिंग में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और संजू सैमसन जैसे विकल्प होने के बावजूद भारतीय टीम को बीते 10 मैचों में एक भी 50 रन की ओपनिंग साझेदारी नसीब नहीं हुई है.
ये हाल उस वक्त है जब वर्ल्ड कप से पहले इस बात का इतना हाइप बना हुआ था कि ईशान किशन की वापसी के बाद टी20 इंटरनेशनल में तीन शतक लगा चुके संजू सैमसन को प्लेइंग 11 में जगह नहीं मिल पा रही. भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जा रहे शुभमन गिल तो टीम के 15 खिलाड़ियों में भी जगह नहीं बना पाए थे.
लेकिन सुपर-8 आते आते भारतीय ओपनर्स को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं. क्योंकि दूसरे ओपनर अभिषेक शर्मा तीन मैचों में जीरो-जीरो के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किसी तरह खाता खोलने में कामयाब तो हुए पर15 रन से आगे नहीं बढ़ पाए.
ओपनिंग के अलावा इस वर्ल्ड कप के दौरान भारत के नंबर तीन का हाल भी कुछ खास नहीं है. ग्रुप स्टेज के दौरान जब तिलक वर्मा के बल्ले से चार मैचों में महज 120 के स्ट्राइक रेट से 106 रन ही निकले तो टीम में उनके होने पर सवाल उठने लगे.
शनिवार को मैच से एक दिन पहले सूर्यकुमार यादव से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तिलक वर्मा के फॉर्म पर सवाल भी किया गया. जिसके जवाब में सूर्यकुमार ने कहा कि तिलक वर्मा की क्षमता पर आखिर कैसे शक किया जा सकता है.लेकिन दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ तिलक वर्मा दो गेंद पर एक रन बनाकर ही पवेलियन वापस लौट गए और पारी की शुरुआती सात गेंद में दो विकेट गिरने की वजह से टीम इंडिया को वापसी करने का मौका ही नहीं मिल पाया.
वैसे तो टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी का फ्लॉप शो टूर्नामेंट में अमेरिका के ख़िलाफ़ पहले मैच में ही सामने आ गया था, जब भारत ने 77 रन पर ही 6 विकेट गंवा दिए थे. लेकिन उस मैच में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 49 रन पर 84 रन की नाबाद पारी खेलकर भारतीय टीम को 29 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.
पर इस पारी के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव भी रन बनाते हुए संघर्ष कर रहे हैं. इस टूर्नामेंट में उन्होंने पांच मैचों में 180 रन बनाए हैं. लेकिन इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 127 का ही रहा है. ये टी20 इंटरनेशनल में उनके ओवरऑल 162 के स्ट्राइक रेट से काफी कम है.
उनका इस तरह से धीमी बल्लेबाजी करना ये भी दिखाता है कि टॉप ऑर्डर का नाकाम होना किस तरह से भारतीय बैटिंग लाइनअप को दबाव में डाल रहा है.
स्पिन के ख़िलाफ़ लगातार संघर्ष करते भारतीय बल्लेबाज़ों की ये कमजोरी दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ और भी खुलकर सामने आई जब 15वें ओवर में केशव महाराज ने तीन बल्लेबाज़ों को पवेलियन वापस भेज दिया.
भारत के पूर्व तेज गेंदबाज़ इरफ़ान पठान ने भी माना है कि वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय बल्लेबाज़ी संघर्ष कर रही है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “भारत का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. भारतीय बल्लेबाज़ों के संघर्ष को दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज़ों ने एस्पोज कर दिया. भारतीय बैटिंग लाइनअप वर्ल्ड कप के दौरान अपनी लय नहीं तलाश पा रही है.”