प्लास्टिक के कारखाने में उपयोग होने वाला कच्चा माल की कीमतों में बेहतशा वृद्धि ने इन उद्योगों के उत्पादन को चालू रखना मुश्किल हो रहा है
ऐसे में लाखों करोड़ों का कारोबार और लाखों रोजगार खतरे में आ गया है
इन कारखाना में उसे होने वाला कच्चा माल जैसे बीपी एचडी एलजीपी जैसे अन्य कई सारे माल जो बहुत आता है से बाहर के देश जैसे यूएई चीन थाईलैंड मलेशिया जैसे तेल उत्पादक देश से आता था
युद्ध से पहले इन कच्चे मालों का दाम अंदाजा सो रुपए से लेकर ₹200 के बीच का आज में 60 से 70% तक मूल्य वृद्धि हो गई है
इतने महंगे कच्चे माल से बने उत्पादों को अब कोई मार्केट में खरीदने को तैयार नहीं केवल रोजमर्रा की आवश्यकताओं की चीजों की अब उपयोग में आ रही है जैसे कि फूड कंटेनर सीरीज सलाइन बॉटल।
इसके कारण सबसे ज्यादा मार छोटे उद्योगों पर पड़ी है दाने की मार ने छोटे उद्योग को सारे देश भर में बंद करने पर मोहताज कर दिया है
एवं कारीगर अब सब अपने-अपने प्रदेशों में वापसी के लिए कूच कर रहे हैं
प्लास्टिक उद्योगों का कहना है कि देश में 50000 के आसपास प्लास्टिक उद्योग है जिनमें से 85% से ज्यादा ज्यादा एमएसएमई उद्योगों की श्रेणी में आते हैं देश में प्लास्टिक का सालाना कारोबार 3 लाख 70000 हजार करोड़ का है इसमें से 100000 करोड़ का निर्यात होता है
अब उत्पादन पर गंभीर असर दिख रहा है ऐसे छोटे-छोटे उद्योगों में 50000 से 60000 लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है
मशीन बंद होने से हजारों कारीगर बेरोजगार हो गए है अगर रॉ मटेरियल के रेट इसी तरह से बढ़ते रहे तो इसका असर उपभोक्ताओं पर आना लगभग तय है