आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर की ज़िम्मेदारी राघव चड्ढा की जगह अशोक कुमार मित्तल को दे दी है.
इसके बाद शुक्रवार को राघव चड्ढा ने इस फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, कि वह जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं और सवाल पूछा कि इससे आम आदमी पार्टी का क्या नुक़सान हुआ होगा.
इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने एक के बाद एक वीडियो जारी कर राघव चड्ढा पर पार्टी के और देश हित से जुड़े मुद्दों पर ख़ामोश रहने और बीजेपी से डरने का आरोप लगाया.
आम आदमी पार्टी नेताओं ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी के समय राघव चड्ढा के लंदन में होने पर भी सवाल उठाए.
उधर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह वडिंग ने कहा है कि ‘राघव चड्ढा या तो आम आदमी पार्टी छोड़ देंगे या फिर उन्हें निकाल दिया जाएगा.’
राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर बताया कि राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उपनेता बनाया जाए. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने का समय न दिया जाए.
शुक्रवार को राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर कहा, “मुझे जब-जब संसद में बोलने का मौक़ा मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूँ और शायद ऐसे मुद्दे उठाता हूं जिसे आमतौर पर संसद में नहीं उठाया जाता. लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना, जनता की समस्याओं पर बात करना कोई अपराध है?”
राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को कहा है कि उनके राज्यसभा में ‘बोलने पर रोक लगा दी जाए’.
उन्होंने कहा, “मेरे बोलने पर कोई रोक क्यों लगाना चाहेगा?”
राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने जो मुद्दे उठाए, उससे आम आदमी का तो फ़ायदा हुआ. लेकिन आम आदमी पार्टी का क्या नुक़सान हुआ? भला कोई मुझे बोलने से कोई क्यों रोकना चाहेगा? कोई मेरी आवाज़ को क्यों बंद करना चाहेगा?”
“जिन लोगों ने आज पार्लियामेंट में मेरे बोलने का अधिकार छीन लिया, मुझे ख़ामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं… मेरी ख़ामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वह दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनाता है.”
गुरुवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में अशोक कुमार मित्तल ने कहा था, “राज्यसभा या लोकसभा में पार्टी के जो लीडर या डिप्टी लीडर होते हैं, समय-समय पर उनका बदलाव होता रहता है. राघव जी से पहले एनडी गुप्ता जी डिप्टी लीडर थे, आज मैं बना हूँ, कल कोई और आएगा.”
उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी लोकतांत्रिक पार्टी है और वह समय-समय पर पार्टी के लोगों को ट्रेनिंग भी देना चाहती है और सभी की प्रतिभा को उभारने की कोशिश भी करती है. इसी कड़ी में पार्टी ने यह फ़ैसला लिया है ताकि मैं यह ज़िम्मेदारी निभाऊं और और सीख सकूं.”
उन्होंने कहा कि पार्टी में सब ठीक है. लेकिन शुक्रवार को आप के नेताओं ने राघव चड्ढा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया.
आप नेता ने अनुराग ढांडा ने कहा कि राघव चड्ढा मोदी से डर गए हैं.
एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा, “हम केजरीवाल के सिपाही हैं. निडरता पहली पहचान है हमारी. कोई मोदी से डर जाए तो लड़ेगा क्या देश के लिए? संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का.
अनुराग ढांडा ने लिखा, “पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव. मोदी के ख़िलाफ़ बोलने से घबराते हो. देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो. जो डर गया वो…..”
राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने राघव चड्ढा के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि ‘देश के सामने गैस की किल्लत, बंगाल में वोटर्स के ख़िलाफ़ घोटाला, और पंजाब में पार्टी के अधिकारों का छीने जाना जैसे ज्वलंत मुद्दे हैं उनपर राघव कुछ नहीं बोलते.’
उन्होंने कहा, “राघव चड्ढा जी से मैं कहना चाहूंगा कि जो आम आदमी पार्टी का मुद्दा है, सीईसी के ख़िलाफ़ प्रस्ताव आता है, आप साइन नहीं करते… ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका जवाब उनको देना होगा.”
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता आतिशी ने आप सांसद राघव चड्ढा पर बीजेपी से डरने का आरोप लगाया.
उन्होंने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “मैं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा से सवाल पूछना चाहती हूं कि आप बीजेपी से इतना डरते क्यों हो. आप मोदी से सवाल उठाने से इतना डरते क्यों हैं. आज हमारी आंखों के सामने इलेक्शन कमीशन का मिसयूज़ करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन आप उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “जब अरविंद केजरीवाल जी गिरफ़्तार हुए तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे. आप (राघव चड्ढा) तब लंदन में थे. लेकिन आज मेरे मन में भी सवाल आ रहा है कि क्या आप डर कर लंदन भाग गए.”
आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “अरविंद केजरीवाल जी को बतौर मुख्यमंत्री सरकार ने एक झूठे मुक़दमे में गिरफ़्तार किया, आप उस समय भी देश में नहीं थे. आप कहीं जाकर छिप गए.”
इसके अलावा सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर संसद में ‘सॉफ़्ट पीआर करने’ का आरोप लगाते हुए कहा, “संसद में एक छोटी पार्टी के पास बहुत ही सीमित समय होता है और उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा है तो उससे ज़रूरी है कि देश के बड़े मुद्दों की बात उठाए.”
उधर विपक्ष ने आम आदमी पार्टी में छिड़े विवाद पर चुटकी ली है.
पंजाब में कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर राजा सिंह वडिंग ने कहा, “राघव चड्ढा अलग हैं और आम आदमी पार्टी अलग है. हमें तो बहुत पहले पता लग गया था, जब वह लंदन गए थे और अरविंद केजरीवाल को गिरफ़्तार किया गया था… वह अब आम आदमी पार्टी में भी नहीं रहेंगे. वह कहां जाएंगे यह मुझको नहीं पता लेकिन जैसे आम जनता में पर्सेप्शन बन जाता है, यह है कि राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़ेंगे या निकाले जाएंगे.”
बीजेपी सांसद रामवीर सिंह विधूड़ी ने कहा, “जब मैं दिल्ली विधानसभा में विपक्ष का नेता था, तब राघव चड्ढा विधायक थे. दिल्ली विधानसभा में भी वह बोलते थे, अच्छा लगता था. बाद में वह राज्यसभा में आ गए, यहां भी वह जनहित के मुद्दे उठाते हैं.”
उन्होंने पीटीआई को बताया, “मेरी समझ से परे है कि अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा के बोलने पर पाबंदी कैसे लगा दी है. उन्हें उपनेता बनाए रखना या न रखना पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन अगर किसी वरिष्ठ सदस्य और सांसद के बोलने पर भी आम आदमी पार्टी ने रोक लगाई है तो मेरा मानना है कि यह लोकतंत्र की हत्या की गई है. अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी लीडरशिप को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए.”
साल 2013 में जब अन्ना हज़ारे का इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन अपने आख़िरी दौर में था, तभी राघव चड्ढा की मुलाकात अरविंद केजरीवाल से हुई.
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा राघव उस समय लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर के भारत लौटे थे.
डेली ओ की एक रिपोर्ट के अनुसार राघव चड्ढा का पार्टी में पहला असाइनमेंट दिल्ली जनलोकपाल बिल का ड्राफ़्ट तैयार करने वाले अधिवक्ता राहुल मेहरा को असिस्ट करना था. उन्हें ये ज़िम्मेदारी अरविंद केजरीवाल ने सौंपी थी.
राघव चड्ढा पार्टी के सबसे युवा प्रवक्ता बने और कुछ ही समय में राघव चड्ढा टेलीविज़न पर आम आदमी पार्टी का चेहरा बन चुके थे.
आम आदमी पार्टी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार राघव साल 2013 में आम आदमी पार्टी के घोषणापत्र बनाने वाली टीम के सदस्य थे. कुछ समय के लिए वह पार्टी के कोषाध्यक्ष भी बनाए गए.
एक दशक पहले एक वॉलंटियर के तौर पर अरविंद केजरीवाल की टीम में शामिल हुए राघव चड्ढा अब उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में गिने जाते हैं.
साल 2019 में राघव चड्ढा दक्षिणी दिल्ली की संसदीय सीट पर चुनाव लड़े, लेकिन असफल रहे. इसके बाद 2020 विधानसभा चुनाव में उन्होंने दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट से जीत दर्ज की.
मार्च 2022 में राघव चड्ढा और चार अन्य लोगों को आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया. उस समय राघव चड्ढा 33 साल के थे और सबसे युवा सांसद बने.
ये माना जाता है कि साल 2022 में पंजाब में मिली आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत में राघव चड्ढा ने अहम भूमिका निभाई. पंजाब की सफलता को देखते हुए ही पार्टी ने उन्हें 2022 के आख़िर में गुजरात विधानसभा चुनाव की भी ज़िम्मेदारी सौंपी और सह प्रभारी बनाया.