देहरादून। देवभूमि युवा संगठन ने देहरादून स्थित लच्छीवाला टोल प्लाजा को हटाने की मांग उठाते हुए कहा है कि उत्तराखंड के लोगों को अपने ही राज्य में छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए टोल टैक्स देना पड़ रहा है, जो जनहित के विपरीत है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को स्थानीय नागरिकों को राहत देने के लिए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संगठन के अध्यक्ष गंगाधर ने कहा कि देहरादून, डोईवाला और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग प्रतिदिन हिमालयन अस्पताल, डोईवाला, जौलीग्रांट एयरपोर्ट तथा अन्य कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। कई लोगों को मात्र 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी टोल शुल्क चुकाना पड़ता है। इससे आम नागरिकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और मरीजों के परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग रोजाना अस्पताल में उपचार, नौकरी, शिक्षा या व्यापारिक कार्यों के लिए आते-जाते हैं, उनके लिए यह टोल एक बड़ी समस्या बन चुका है। एक राज्य के नागरिकों से अपने ही क्षेत्र में दैनिक आवागमन के लिए बार-बार शुल्क वसूलना उचित नहीं है।
देवभूमि युवा संगठन का कहना है कि उत्तराखंड एक देवभूमि और पर्यटन प्रदेश होने के साथ-साथ आम लोगों की आजीविका का केंद्र भी है। ऐसे में सरकार को स्थानीय निवासियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए लच्छीवाला टोल प्लाजा को हटाने अथवा स्थानीय लोगों को पूर्ण छूट देने पर विचार करना चाहिए।
संगठन ने राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मांग की है कि लच्छीवाला टोल प्लाजा की व्यवस्था की समीक्षा कर स्थानीय जनता को राहत प्रदान की जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जनसमर्थन के साथ व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
देवभूमि युवा संगठन ने कहा कि विकास के साथ-साथ जनता की सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और सरकार को अपने ही राज्य के लोगों पर पड़ रहे टोल के बोझ को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।