June 10, 2026

डिजिटल निर्भरता की बढ़ती चुनौती: मोबाइल की लत से प्रभावित हो रहे रिश्ते और बचप

कौशांबी। तकनीक ने दुनिया को पहले की तुलना में अधिक जुड़ा हुआ बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते दुष्प्रभाव अब परिवार और समाज के सामने गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहे हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों और युवाओं के मानसिक, सामाजिक तथा बौद्धिक विकास को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता परिवारों के बीच संवाद और भावनात्मक जुड़ाव को कमजोर कर सकती है।

ऑनलाइन पढ़ाई के बहाने बढ़ रहा स्क्रीन टाइम

अभिभावक अक्सर बच्चों को पढ़ाई में सहायता के उद्देश्य से मोबाइल उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कई मामलों में बच्चे और किशोर पढ़ाई के साथ-साथ सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, शॉर्ट वीडियो और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लंबे समय तक समय बिताने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत अत्यधिक स्क्रीन उपयोग का रूप ले सकती है, जिससे पढ़ाई, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों में उनकी रुचि कम होने लगती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की जिज्ञासाओं और भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने के बजाय उन्हें लंबे समय तक स्क्रीन के हवाले कर देना उनके व्यक्तित्व विकास को प्रभावित कर सकता है।

रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच पर प्रभाव

लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पहले बच्चे चित्र बनाते थे, कहानियां लिखते थे, पहेलियां हल करते थे और अपने अनुभवों से सीखते थे। आज तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण कई बच्चे हर छोटे-बड़े कार्य के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लेने लगे हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक शिक्षा एवं ज्ञान के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इनका संतुलित उपयोग आवश्यक है। तकनीक सहायक उपकरण हो सकती है, लेकिन वह मानवीय सोच, रचनात्मकता और अनुभव का स्थान नहीं ले सकती।

परिवारों में घटता संवाद

मोबाइल का अत्यधिक उपयोग पारिवारिक रिश्तों को भी प्रभावित कर रहा है। एक ही घर में रहने वाले लोग घंटों अपने-अपने मोबाइल उपकरणों में व्यस्त रहते हैं। भोजन के समय, पारिवारिक बैठकों और आपसी बातचीत की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ने की आशंका रहती है।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए परिवार के साथ संवाद, साझा गतिविधियां और भावनात्मक जुड़ाव अत्यंत आवश्यक हैं। जब यह स्थान डिजिटल उपकरण ले लेते हैं, तो बच्चे वास्तविक सामाजिक अनुभवों की तुलना में आभासी दुनिया की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं।

अभिभावक क्या कर सकते हैं?

मोबाइल उपयोग को संतुलित रखने के लिए अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञ निम्न सुझाव देते हैं—

  • बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियमित नजर रखें।
  • आवश्यकता होने पर पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का उपयोग करें।
  • प्रतिदिन बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं।
  • खेलकूद, पुस्तक पठन, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।
  • घर में निश्चित समय के लिए “मोबाइल-मुक्त अवधि” निर्धारित करें।
  • तकनीक का उपयोग ज्ञान और सीखने के साधन के रूप में करने की आदत विकसित करें।

निष्कर्ष

मोबाइल और इंटरनेट आधुनिक जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुके हैं, लेकिन इनका संतुलित उपयोग ही लाभदायक है। तकनीक हमें जानकारी और सुविधाएं प्रदान कर सकती है, किंतु संस्कार, संवेदनाएं और रिश्तों की गर्माहट परिवार और समाज से ही प्राप्त होती है।

यदि बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को समय रहते संतुलित करने के प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ी तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि तकनीक को जीवन का साधन बनाया जाए, जीवन का केंद्र नहीं।

Written by

ANAND KUMAR DWIVEDI

District Reporter

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