Author: MAHESH PRASAD MISHRA

✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से देश की राजनीति अब उस मोड़ पर पहुँच चुकी है जहाँ सड़कें भी धर्म और दिखावे की प्रयोगशाला बन चुकी हैं।कभी किसी नेता को सड़क पर कांवड़ दिखती है, तो कोई उसे नमाज का मंच बना देना चाहता है। मज़े की बात यह है कि दोनों ही यह भूल जाते हैं —सड़कें पूजा या प्रदर्शन के लिए नहीं, चलने और जोड़ने के लिए होती हैं। नगीना के सांसद चंद्रशेखर ने कहा — “जब कांवड़ के लिए सड़कें बंद हो सकती हैं, तो नमाज के लिए आधा घंटा क्यों नहीं?”उनके जवाब में…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से कभी इतिहास से सीख लेने की बात करने वाले नेता,अब इतिहास को अपने भाषणों की कहानी बना चुके हैं।कभी जो घटनाएँ हमें जोड़ने के लिए थीं,वो अब वोट बैंक के हिसाब से तोड़ी-मरोड़ी जा रही हैं। सत्ताधारी वर्ग ने अपने चतुर शब्दों से जनता को फिर से वही दिखाया —कि असली समस्या बेरोज़गारी, महँगाई या शिक्षा नहीं,बल्कि “कौन कौन था” और “कौन कौन बन गया” है। आज का नागरिक खुद से पूछे —इतिहास में कौन जीता, कौन हारा, इससे देश नहीं चलता;देश तब चलता है जब वर्तमान सच बोलने की हिम्मत…

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