Author: DR. MAHESH PRASAD MISHRA

✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा I इन्दौर। भोपाल  रफ़्तार, नशा और बेपरवाह आज़ादी—यह वो घातक मिश्रण है जिसने एक बार फिर मध्य प्रदेश के तीन घरों के चिरागों को सदा के लिए बुझा दिया। रालामंडल क्षेत्र में हुआ भीषण सड़क हादसा केवल एक ‘एक्सीडेंट’ नहीं, बल्कि उन युवाओं और माता-पिता के लिए एक कड़ा सबक है जो रफ़्तार और नशे की दुनिया को ‘मस्ती’ समझ लेते हैं। हादसे की भयावहता: जन्मदिन का जश्न मातम में बदला हादसा उस वक्त हुआ जब प्रखर कासलीवाल (कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के पुत्र) का जन्मदिन मनाकर चार दोस्त फॉर्म हाउस से वापस लौट…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा  I भोपाल यह सवाल आज ग्वालियर ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश की जनता पूछ रही है—थाना आखिर चलता किसके आदेश से है? संविधान से या प्रभावशाली आरोपियों से? यदि जनचर्चा और उपलब्ध तथ्यों पर भरोसा किया जाए, तो मकरंद बौद्ध, जो गंभीर आपराधिक मामले में फरार आरोपी बताया जा रहा था, वह न केवल पुलिस की पहुंच में रहा, बल्कि थाने में जाकर स्वयं एफआईआर दर्ज कराता है और बिना किसी गिरफ्तारी के बाहर निकल जाता है।यह दृश्य अपने-आप में पूरे पुलिस तंत्र पर तमाचा है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 249 स्पष्ट कहती…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा / भोपाल नई दिल्ली/भोपाल: हाल के वर्षों में न्यायिक फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई के जो तरीके सामने आए हैं, उन्होंने भारत के सामान्य वर्ग (General Category) के भीतर एक गहरे असुरक्षा भाव को जन्म दिया है। जहाँ एक ओर सुप्रीम कोर्ट मेरिट में आगे रहने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में भी हक देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर सामान्य वर्ग का युवा खुद को सिमटते अवसरों के बीच पाता है। संविधान की धारा 14 और 16 का चयनात्मक प्रयोग? संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा / भोपाल भोपाल | कालियासोत डैम के पास बड़ा हादसा टला – ड्राइविंग के दौरान मोबाइल बना जानलेवा खतरा भोपाल के कालियासोत डैम क्षेत्र में आज दोपहर लगभग 12:10 बजे एक गंभीर सड़क दुर्घटना होते-होते रह गई। एक टाटा नेक्सॉन कार, जिसे एक महिला चालक चला रही थीं, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल कॉल रिसीव करने की वजह से संतुलन खो बैठी और कार सीधे क्रैश बैरियर पर चढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कॉल आते ही चालक ने मोबाइल पर बात करना शुरू कर दिया। इसी दौरान उनका ध्यान सड़क से हट गया और कार का…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा / भोपाल यदि जनचर्चा और उपलब्ध तथ्यों पर भरोसा किया जाए, तो ग्वालियर में जो कुछ घटित हुआ है, वह केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षित अराजकता का खुला प्रदर्शन प्रतीत होता है।एक ऐसा व्यक्ति मकरंद बौद्ध, जिस पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं और जो लंबे समय से फरार बताया जा रहा है, वह न केवल खुलेआम घूमता है बल्कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पारिवारिक समारोह में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित होता है—और पुलिस उसे पहचानने के बावजूद हाथ तक नहीं लगाती। यह कोई साधारण लापरवाही नहीं हो सकती। …

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा / भोपाल / ग्वालियर।  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर विपक्ष और सोशल मीडिया के निशाने पर है। मामला ग्वालियर का है, जहाँ पुलिस रिकॉर्ड में छह महीने से ‘फरार’ घोषित बलात्कार का आरोपी मकरंद बौद्ध न केवल खुलेआम घूमता पाया गया, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों के साथ उसकी मौजूदगी ने प्रदेश की कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। फरार अपराधी, पुलिस की मेहमाननवाजी और ‘सियासी सेटिंग’ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है…

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नाम धर्म का, धंधा सुविधा का: देश कब तक इस दोहरे चरित्र का बोझ ढोएगा?  — डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल सवाल सीधा है—जब बिना हिन्दू देवी-देवताओं के नाम के कई लोगों का काम नहीं चलता, तो फिर टकराव किस बात का है? सड़क किनारे लगा एक बोर्ड बहुत कुछ कह जाता है—“माँ दुर्गा कार एंड बाइक सर्विस सेंटर”। नाम आस्था का, भरोसे का, और पहचान का है। पर बहस यहीं से शुरू होती है। अगर किसी विचारधारा के अनुसार देवी-देवताओं का नाम लेना “हराम” है, तो उन्हीं नामों पर कारोबार करना किस श्रेणी में आएगा—हराम या अचानक “हलाल”? यही…

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भोपाल | विशेष रिपोर्ट — डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल इतिहास गवाह है—घमंड का अंत तय होता है। रावण का अहंकार टूटा था, और सत्ता का अहंकार भी एक दिन टूटता है। आज मध्यप्रदेश में यही चेतावनी हवा में तैर रही है। सत्ता के शिखर पर बैठी सरकार ऐसी आत्ममुग्ध प्रतीत होती है कि उसे न सही दिख रहा है, न गलत। यही वह स्थिति है जहाँ लोकतंत्र सबसे अधिक खतरे में पड़ता है। इंदौर जैसे बड़े शहर में जहरीला पानी पीने से लोगों की मौतें होना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि संवेदनहीन शासन का प्रमाण है। इसके विपरीत, एक…

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— डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से 🚩1 जनवरी—बलिदान का दिन: जब साधारण किसान ने अत्याचार के विरुद्ध संगठित होकर धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की मथुरा–ब्रजभूमि के इतिहास में 1 जनवरी केवल कैलेंडर का पन्ना नहीं, बल्कि वीर गोकुला जाट के अमर बलिदान का स्मरण दिवस है। सन् 1670 में जब औरंगज़ेब ने ब्रज क्षेत्र के मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया, तब किसी राजघराने या सेनानायक नहीं, बल्कि एक साधारण किसान—वीर गोकुला—ने अन्याय के विरुद्ध बिगुल फूंका। धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गोकुला ने आसपास के गाँवों के किसानों को संगठित किया।…

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✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से विशेष संपादकीय: भारत आज एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। संविधान का नाम लेकर सामाजिक सौहार्द को तोड़ा जा रहा है, धर्मग्रंथों का अपमान खुलेआम हो रहा है और सरकारें—चाहे केंद्र की हों या राज्यों की—अक्सर मौन दर्शक बनी दिखाई देती हैं। संविधान, जो मूलतः सामाजिक समरसता, न्याय और समानता का माध्यम था, आज कुछ समूहों द्वारा राजनीतिक पहचान और वैचारिक टकराव का औजार बनता जा रहा है। प्रश्न यह नहीं कि संविधान का सम्मान होना चाहिए या नहीं—प्रश्न यह है कि क्या संविधान का प्रयोग समाज को जोड़ने के…

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