अबूझमाड़ के रेकावया गांव में आजादी के बाद पहली बार स्कूल का निर्माण हो रहा है। यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि उस उम्मीद का प्रतीक है जिसका वर्षों से इंतजार किया जा रहा था। नारायणपुर के दूरस्थ इलाकों में 50 से अधिक ऐसे स्कूल दोबारा खोले गए हैं, जहां कभी नक्सली गतिविधियों के कारण ताले लग गए थे। अब बच्चे बिना भय के शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
बस्तर का चर्चित गांव पुवर्ती, जिसे कभी नक्सली गतिविधियों का मजबूत केंद्र माना जाता था, आज सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ चुका है। यह बदलाव संकेत देता है कि विकास अब जंगलों और पहाड़ियों को पार करते हुए अंतिम छोर तक पहुंच रहा है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 521 गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सुविधाओं का विस्तार किया गया। एक लाख से अधिक लोगों के आधार कार्ड बनाए गए, लगभग 60 हजार लोगों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए तथा बड़ी संख्या में राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड वितरित किए गए।
इन क्षेत्रों में 43 नई सड़कों का निर्माण किया गया है। मोबाइल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार नए टावर लगाए जा रहे हैं। महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत सीधे खातों में राशि मिलने से आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
पिछले ढाई वर्षों में नक्सल विरोधी अभियान में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने 500 से अधिक नक्सलियों को निष्प्रभावी किया है। वहीं नई पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 2800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 2037 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।
स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के लिए 86 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। इन कैंपों की मदद से प्रशासन अब उन इलाकों तक पहुंच पा रहा है, जहां पहले पहुंचना बेहद कठिन माना जाता था।