15 वर्षों बाद भी नहीं हुई सीमांकन प्रक्रिया पूरी, किसान ने राजस्व कार्रवाई में देरी का लगाया आरोप
बिजनौर | विशेष संवाददाता
बिजनौर जिले के सुआवाला निवासी 85 वर्षीय किसान रमेश कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके खेत की सीमांकन (ठीए बंदी) प्रक्रिया पिछले लगभग 15 वर्षों से लंबित है, जिसके कारण उन्हें लगातार राजस्व न्यायालयों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसान के अनुसार उन्होंने वर्ष 2011 में तहसील धामपुर के अंतर्गत राजस्व ग्राम मुरादनगर स्थित गाटा संख्या 111 के सीमांकन के लिए तत्कालीन प्रावधानों के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी राजकोष में जमा कराया गया था। बाद में राजस्व निरीक्षक द्वारा सीमांकन संबंधी कार्रवाई की गई, लेकिन प्रस्तुत रिपोर्ट पर आपत्तियां उठीं और मामला लंबे समय तक विभिन्न राजस्व न्यायालयों में विचाराधीन रहा।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, मामले की सुनवाई विभिन्न स्तरों पर होती रही। किसान का कहना है कि सीमांकन संबंधी रिपोर्ट में त्रुटियों और प्रक्रिया में देरी के कारण विवाद का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में 200 से अधिक सुनवाई तिथियां बीत चुकी हैं, लेकिन अंतिम समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
मामले में वर्ष 2024 में मंडलायुक्त न्यायालय द्वारा पारित आदेश में अधीनस्थ न्यायालय को पुनः रिपोर्ट प्राप्त करने तथा आवश्यक पक्षकारों को शामिल कर सुनवाई के बाद गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया।
किसान का आरोप है कि मंडलायुक्त के आदेश के बाद भी सीमांकन प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी। हालांकि, इस संबंध में संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।
न्यायालय के हालिया निर्देशों का संदर्भ
राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 के अंतर्गत सीमांकन और कब्जा बहाली से जुड़े मामलों में हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। न्यायालय ने सीमांकन प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग तथा अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर बल दिया है। न्यायालय ने यह भी कहा है कि सीमांकन संबंधी आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना आवश्यक है।
आधुनिक तकनीक के उपयोग की मांग
किसान और स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमांकन संबंधी विवादों के शीघ्र और सटीक समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे ETS (Electronic Total Station) और DGPS (Differential Global Positioning System) का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भूमि मापन संबंधी विवादों का समयबद्ध निस्तारण संभव हो सकेगा।
फिलहाल यह मामला राजस्व प्रक्रिया के अंतर्गत विचाराधीन है और संबंधित पक्ष समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।