ईद-उल-फितर कल, दिखा ईद का चांद…समानता, करुणा और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है ईद देश में आज धूमधाम से मनाया जाएगा भाई चारे का पर्व ईद,सदभाव व मदद का पैगाम देता है ईद ईद का पर्व रोजे के समापन का प्रतीक माना जाता है (आनन्द कुमार द्विवेदी/ कौशाम्बी ब्यूरो
ईद-उल-फितर कल, दिखा ईद का चांद…समानता, करुणा और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है ईद
देश में आज धूमधाम से मनाया जाएगा भाई चारे का पर्व ईद,सदभाव व मदद का पैगाम देता है ईद
ईद का पर्व रोजे के समापन का प्रतीक माना जाता है
(आनन्द कुमार द्विवेदी/ कौशांबी ब्यूरो)
कौशाम्बी….. आज ईद का चांद दिखने के बाद कल शनिवार 21 मार्च को देश भर में धूमधाम से भाई चारे का पर्व ईद मनाया जाएगा।ईद मुस्लिम समुदाय का सबसे प्रमुख त्योहार है. भारत के साथ साथ अन्य देशों में भी ईद का त्योहार मनाया जाता है।एक महीने के रोजे रखने के बाद ईद उल फितर का त्योहार मनाया जाता है।
ईद-उल-फितर केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का भी अवसर होता है। इस दिन घरों में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। इनमें सेवइयाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध होती हैं, जिन्हें “शीर खुरमा” के रूप में भी बनाया जाता है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और मित्र एक-दूसरे के घर जाते हैं और मिलकर भोजन करते हैं। बच्चे विशेष रूप से इस दिन बहुत खुश होते हैं, क्योंकि उन्हें “ईदी” के रूप में उपहार या पैसे मिलते हैं।
कहा जाता है कि अल्लाह ने रमजान के 30 रोजे रखने पर इनाम के तौर पर खुशियों का पर्व ईद उल फितर दिया। ईद का पर्व रोजे के समापन का प्रतीक माना जाता है और इसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है।इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान साल का नौवां महीना होता है और दसवां महीना शव्वाल होता है और इसी महीने के पहले दिन इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग ईद मनाते हैं.।माना जाता है कि 624 ईस्वी में पहली बार ईद मनाई गई थी और यह ईद पैगंबर मुहम्मद ने मनाई थी। इस ईद को ईद उल-फितर के नाम से जाना जाता है।ईद उल-फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि इस दिन पैगंबर हजरत मुहम्मद बद्र की लड़ाई से विजयी हुए थे तब लोगों ने पैगंबर की सफलता पर अपनी खुशी जाहिर करने के लिए आपस में मिठाइयां बांटी और विभिन्न प्रकार के भोजन बनाए।ईद के दिन मुस्लिम लोग रमजान खत्म होने की खुशी मनाते हैं और कुरान के लिए अल्लाह का आभार व्यक्त करते हैं. इस्लाम में ईद के त्योहार के दौरान पांच सिद्धांतों का पालन करना सबसे जरूरी माना जाता है. ये पांच सिद्धांत हैं नमाज़ पढ़ना, हज यात्रा, ईमान, रोजा और जकात. इस्लामिक प्रथा के अनुसार ईद की नमाज अदा करने से पहले हर मुस्लिम व्यक्ति को दान या जकात देना जरूरी होता है.
*सदभाव और मदद का पैगाम देता है ईद का पर्व*
ईद का त्योहार सबको साथ लेकर चलने का संदेश देता है। ईद पर हर मुसलमान चाहे वो आर्थिक रुप से संपन्न हो या न हो, सभी एकसाथ नमाज पढ़ते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं। इस्लाम में चैरिटी ईद का एक महत्वपूर्ण पहलू है। हर मुसलमान को धन, भोजन और कपड़े के रूप में कुछ न कुछ दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कुरान में ज़कात अल-फ़ित्र को अनिवार्य बताया गया है। जकात यानी दान को हर मुसलमान का फर्ज कहा गया है। ये गरीबों को दिए जाने वाला दान है। परंपरागत रूप से इसे रमजान के अंत में और लोगों को ईद की नमाज पर जाने से पहले दिया जाता है। मुस्लिम अपनी संपत्ति को पवित्र करने के रूप में अपनी सालाना बचत का एक हिस्सा गरीब या जरूरतमंदों को कर के रूप में देते हैं। विश्व के कुछ मुस्लिम देशों में ज़कात स्वैच्छिक है, वहीं अन्य देशों में यह अनिवार्य है।