भारतीय सनातन सेना के तत्वावधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पिनाक शर्मा के नेतृत्व में ‘UGC रोलबैक’ का स्वर, जयपुर के शहीद स्मारक पर गूंजा प्रभावशाली विरोध
4 Feb 2026, जयपुर, के ऐतिहासिक **शहीद स्मारक** पर हाल ही में एक महत्वपूर्ण जनसभा और प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन **भारतीय सनातन सेना** के तत्वावधान में किया गया और इसका नेतृत्व संगठन के **राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पिनाक शर्मा** ने किया। सभा का मुख्य उद्देश्य **यूजीसी के नए नियमों के विरोध** में आवाज उठाना और सरकार से उन्हें वापस लेने की मांग करना था।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपनी असहमति व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। इस सभा का केंद्र बिंदु **UGC रोलबैक** की मांग रही, जिसे वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था और समान अवसर से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
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## विरोध की आवाज: क्यों उठी ‘UGC रोलबैक’ की मांग
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष **पिनाक शर्मा** ने कहा कि यूजीसी द्वारा प्रस्तावित नए नियम कई दृष्टियों से चिंताजनक हैं। उनके अनुसार ये नियम संविधान में निहित समानता के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन नियमों को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया तो इससे सामान्य वर्ग के युवाओं के शिक्षा के अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा नीति में बदलाव हमेशा ऐसा होना चाहिए जो समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्रदान करे। किसी भी ऐसे प्रावधान को लागू करने से पहले उसके सामाजिक और शैक्षणिक प्रभावों का गंभीर अध्ययन किया जाना आवश्यक है।
सभा में मौजूद वक्ताओं ने यह भी कहा कि शिक्षा केवल नीति का विषय नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है। इसलिए इसमें पारदर्शिता, संतुलन और व्यापक संवाद की आवश्यकता होती है।
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## शहीद स्मारक पर जुटे युवा और सामाजिक संगठन
जयपुर के शहीद स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने **“UGC रोलबैक करो”** और **“काला कानून वापस लो”** जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार के बदलाव को लागू करने से पहले छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों की राय लेना जरूरी है। उनका मानना है कि शिक्षा का अधिकार सभी के लिए समान रूप से सुरक्षित रहना चाहिए।
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने मंच से अपने विचार व्यक्त किए। संरक्षक **एसके शर्मा**, प्रोफेसर **वल्लभ शर्मा**, मुख्य सलाहकार **संजय पारिक**, **हरीश शर्मा**, **दिवाकर शर्मा** और **पवन शर्मा** ने भी सभा को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और पारदर्शिता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
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## पृष्ठभूमि: यूजीसी नियमों पर बढ़ती बहस
हाल के समय में **यूजीसी नियमों** को लेकर देश के कई हिस्सों में चर्चा और बहस देखने को मिल रही है। विभिन्न छात्र संगठन और सामाजिक समूह इस विषय पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव जरूरी होता है। वहीं दूसरी ओर कई संगठन यह तर्क दे रहे हैं कि किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले उसके संभावित सामाजिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
इसी संदर्भ में जयपुर में आयोजित यह सभा भी राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस का एक हिस्सा बन गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े फैसले केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद के बाद लिए जाने चाहिए।
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## आगे क्या: आंदोलन जारी रहने की चेतावनी
सभा के अंत में वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक संगठन का नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जो शिक्षा में समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग करते हैं।
आयोजकों के अनुसार आने वाले समय में इस विषय पर और भी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं ताकि छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को व्यापक स्तर पर उठाया जा सके।
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## निष्कर्ष
जयपुर के शहीद स्मारक पर आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा नीति से जुड़े मुद्दों पर समाज की सक्रियता को दर्शाता है। **UGC रोलबैक** की मांग को लेकर उठी आवाज यह संकेत देती है कि शिक्षा से जुड़े निर्णयों का व्यापक सामाजिक प्रभाव होता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विषय पर क्या कदम उठाती है और क्या सभी पक्षों के बीच संवाद के माध्यम से कोई संतुलित समाधान निकल पाता है।