March 13, 2026

एलपीजी संकट पर सड़क से संसद तक हंगामा, राहुल गांधी का पीएम मोदी पर निशाना, सरकार ने क्या कहा?

ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग की वजह से एलपीजी की क़िल्लत के बीच देश के कई शहरों में घरेलू गैस के ग्राहकों की लंबी क़तारें सुर्खियों में हैं और यह मुद्दा अब सड़क से संसद तक पहुंच गया है.

कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया है और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने एलपीजी मुद्दे को लेकर संसद में बहस की मांग की है.

इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन को 25 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है.

इसीबीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं है और पैनिक करने की ज़रूरत नहीं है. जबकि कांग्रेस सासंद प्रियंका गांधी ने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि उनकी बात सही हो लेकिन ऐसा दिख नहीं रहा है.”लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष के कारण देश एलपीजी की कमी का सामना कर रहा है और इसके बावजूद प्रधानमंत्री लोकसभा में आकर इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते.

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अमेरिका में अडानी पर आरोप तय होने और एपस्टीन फ़ाइल्स के चलते प्रधानमंत्री मोदी घबराहट में हैं.’

उधर, एलपीजी संकट ने देश के कई हिस्सों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है और देश भर के रेस्तरां में कमर्शियल एलपीजी की क़िल्लत से निपटने के लिए कई क़दम उठाए जा रहे हैं.

राहुल गांधी ने गुरुवार सुबह आरोप लगाया है कि संसद में जब उन्होंने एलपीजी संकट पर बोलने की कोशिश की तो उन्हें रोक दिया गया.

उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, “मैंने देश में एलपीजी गैस और तेल की स्थिति पर बयान देने की अनुमति मांगी. लेकिन अब एक नई प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें पहले मंत्री तय करेंगे, फिर मैं बोलूंगा, उसके बाद मंत्री जवाब देंगे. असल बात यह है कि ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ा है. ग़लत विदेश नीति ने यह स्थिति पैदा की है. अब हमें तैयारी करनी होगी. हमारे पास अभी थोड़ा समय है. सरकार और प्रधानमंत्री को तुरंत तैयारी शुरू करनी चाहिए, वरना करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.”

उन्होंने कहा, “यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है. मुझे साफ़ दिखाई दे रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है. समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं. इसके पीछे एक वजह है, वह फंसे हुए हैं. फिर भी उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत के लोग सुरक्षित रहें और हमारी ऊर्जा सुरक्षा हमारे नियंत्रण में रहे.”

हालांकि राज्य सभा सांसद कपिल सिब्बल ने सरकार की फौरी कार्रवाई को सही ठहराया है, “अगर युद्ध जारी रहता है तो काफी परेशानी होगी. इसका असर कई सेक्टरों पर पड़ेगा. इसलिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को पहले और उसके बाद उद्योगों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है, जो सही कदम है. उन्हें पहले से दूरदर्शिता दिखानी चाहिए थी, ईंधन संकट के मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुरवार को लोकसभा में बयान दिया है.

उन्होंने कहा, “रिफ़ाइनरियां उच्च क्षमता उपयोग के साथ काम कर रही हैं. कई मामलों में यह 100 प्रतिशत से भी अधिक पर चल रही हैं. पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ़ या फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है. देश भर के रिटेल आउटलेट्स में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और इन उत्पादों की सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है.”

“होर्मुज़ मार्ग के अलावा अन्य स्रोतों से कच्चे तेल की आपूर्ति अब कुल आयात का लगभग 70 प्रतिशत हो गई है, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यह करीब 55 प्रतिशत थी. भारत के तेल आयात के स्रोत अब 40 देशों तक पहुंच गए हैं, जबकि 2006 और 2007 में यह संख्या 27 देशों की थी.”

हालांकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने बुधवार को बताया था कि ग़लत जानकारी की वजह से घबराहट में बुकिंग और जमाखोरी शुरू हो गई. घरेलू एलपीजी की औसत डिलीवरी अवधि अभी भी लगभग ढाई दिन बनी हुई है.

उन्होंने कहा था कि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) सिस्टम लागू किया गया है ताकि सिलेंडर की हेराफेरी रोकी जा सके. इस सिस्टम में ग्राहक को सिलेंडर लेते समय डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को एक कोड देना होगा, तभी डिलीवरी पूरी मानी जाएगी.

संयुक्त सचिव ने बताया कि मांग को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के लिए एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.उन्होंने ऐसा नहीं किया.”सरकार के भरोसे के बावजूद कई शहरों में एलपीजी के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं जबकि कमर्शियल एलपीजी की कमी के चलते कई रेस्तरां बंद हो गए या उन्हें अपने काम को सीमित करना पड़ा है.

दिल्ली में भी गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. पूर्वी दिल्ली की गीता कॉलोनी में एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों को कई घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है.

हालांकि दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और पीएनजी की कोई कमी नहीं है. साथ ही लोगों को अफ़वाहों से बचने को कहा गया है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की एक ख़बर के अनुसार, बेंगलुरू में एक होटल ने अपने मेन्यू को कम कर दिया है और सिर्फ़ चाय कॉफ़ी की उपलब्धता का नोटिस लगा दिया है.

पुणे के एलपीजी आधारित शवदाह गृह पहले ही बंद हो चुके हैं. यहां भी घरेलू एलपीजी के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, भोपाल में रेस्तरां अब इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं. जबकि मुंबई, पुणे, दिल्ली समेत कई शहरों में रेस्तरां और खानपान बिज़नेस के प्रभावित होने की ख़बरें आ रही हैं.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ और गोरखपुर समेत कई शहरों में कमर्शियल एलपीजी की क़िल्लत की ख़बरों पर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि सरकार क्यों नहीं मान रही है कि समस्या है. रेस्तरां, होटल में एलपीजी सप्लाई की गंभीर समस्याएं हैं. जब ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई है और सरकार इसे मान नहीं रही है तो सरकार इसका हल कैसे निकालेगी?”

अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि ‘अयोध्या में राम के नाम पर चलने वाली राम रसोईयां बंद हो गई हैं. ऐसा पहली बार हुआ है.’बीते 12 दिनों से ईरान जंग के कारण स्ट्रेट होर्मुज़ का वो समुद्री रास्ता प्रभावित हुआ है जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत ईंधन गुजरता है. भारत भी अपना अधिकतर तेल और गैस इसी रास्ते से आयात करता है.

बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, समुद्री जहाजों की आवाजाही पर निगरानी रखने वाली संस्था केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत की ज़रूरत का क़रीब आधा कच्चा तेल, यानी लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आता है. यह तेल मुख्य रूप से इराक़, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से आता है.

केप्लर के रिफ़ाइनरी और तेल बाज़ार विश्लेषक सुमित रिटोलिया ने कहा कि, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित भी होती है, तो इसकी कुछ भरपाई रूस से रियायती दर पर अधिक कच्चा तेल आयात करके की जा सकती है.

केप्लर का कहना है कि मार्च में भारत का रूस से अतिरिक्त कच्चे तेल का आयात लगभग 1 से 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है. इससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर निर्भरता के कारण भारत की वास्तविक कमी घटकर करीब 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह सकती है.

रिटोलिया ने इस सप्ताह की शुरुआत में बताया, “फ़िलहाल करीब 25 से 30 मिलियन बैरल रूसी तेल भारतीय महासागर में जहाजों पर मौजूद है. भारत और चीन ही इसके प्रमुख खरीदार हैं, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर यह तेल तुरंत विकल्प के रूप में उपलब्ध हो सकता है.”

इस बीच ख़बर है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से ईंधन लदे जहाजों को गुजरने के लिए भारत ने ईरान से संपर्क किया है. हालांकि इस पर अभी काफ़ी अस्पष्टता है क्योंकि बीते 24 घंटों में ही तेल टैंकरों के तीन जहाजों को निशाना बनाया गया है.

लेकिन समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से लाइबेरिया झंडा लगा जहाज शेनलांग सुएजमैक्स 1,35,335 मिट्रिक टन कच्चा तेल लेकर मुंबई पहुंच गया है.

SANJAY PANDEY

SANJAY PANDEY

District Reporter

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