शहरों से गांवों की ओर बढ़ता पलायन एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर कर रहा है। कोरोना महामारी ने पहले ही हमारे जीवन और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया था। उस कठिन दौर से उबरने की कोशिश ही कर रहे थे कि अब गैस की किल्लत ने मजदूर वर्ग को फिर से संकट में डाल दिया है।
शहरों में काम करने वाले मजदूर आज दोहरी मार झेल रहे हैं—एक ओर बढ़ती महंगाई और दूसरी ओर आवश्यक संसाधनों की कमी। गैस संकट के कारण उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे रोजगार के अवसर घट रहे हैं। नतीजतन, मजदूर अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
यह स्थिति केवल मजदूरों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शहरी ढांचे और अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है। मजदूरों के पलायन से शहरों की विकास गति धीमी पड़ जाएगी, औद्योगिक उत्पादन घटेगा और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा। साथ ही, महंगाई में और वृद्धि होने की आशंका भी है।
ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। आवश्यक है कि गैस की किल्लत को दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं तुरंत की जाएं। साथ ही, मजदूरों को शहरों में ही रोजगार और रहने की उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें पलायन करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
यह समय एकजुट होकर ठोस कदम उठाने का है, ताकि न केवल मजदूरों का जीवन सुरक्षित रहे, बल्कि शहरों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत बनी रहे।
मेरी कलम