*जनपद पुलिस में सनसनीखेज उथल-पुथल! केशव कुमार का ‘अपराध मुक्त’ मॉडल ध्वस्त, नई एसपी प्राची सिंह पर भारी चुनौती – क्या दोबारा लग पाएगा भ्रष्टाचार का ‘अंकुश’?*
*जनपद पुलिस में सनसनीखेज उथल-पुथल! केशव कुमार का ‘अपराध मुक्त’ मॉडल ध्वस्त, नई एसपी प्राची सिंह पर भारी चुनौती – क्या दोबारा लग पाएगा भ्रष्टाचार का ‘अंकुश’?*
अंबेडकर नगर
एक समय था जब जनपद में अपराध और भ्रष्टाचार का नामोनिशान तक नहीं था। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के सख्त एक्शन ने पूरे विभाग को हिला दिया था। थानों में बैठे भ्रष्टाचार के किंगपिनों पर शिकंजा कसा गया, अवैध गज (गांजा) और सफेद पाउडर (नशीले पदार्थ) की सप्लाई चेन पर पूरी तरह रोक लग गई। अपराध का ग्राफ शून्य के करीब पहुंच गया था। जनता सांस ले रही थी, पुलिस महकमा सुधर रहा था।लेकिन जैसे ही अभिजीत और शंकर जनपद में तैनात हुए, सारी तस्वीर बदल गई। अपराध का ग्राफ अचानक तेजी से बढ़ने लगा। पुराने भ्रष्ट तंत्र ने फिर सिर उठाया। अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी दोबारा धड़ल्ले से शुरू हो गई। थाना स्तर पर घूसखोरी और मिलीभगत की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। जनता फिर सवाल पूछने लगी – “क्या पुलिस फिर पुरानी राह पर लौट गई?”अब नवागत पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह के कंधों पर यह भारी जिम्मेदारी आ पड़ी है। क्या वे केशव कुमार की तरह सख्ती दिखाते हुए अपराध और थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पाएंगी? या फिर ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ के खेल में फंसकर पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी?सबसे बड़ा सवाल तो थानों में लंबे अरसे से जमी पुरानी पुलिसिया ‘लॉबी’ का है। कई सिपाही, पुलिस आरक्षित और थाना अध्यक्ष (एसएचओ) ‘अंडर ट्रांसफर’ होने के बावजूद वर्षों से जनपद में ही डटे हुए हैं। ट्रांसफर के आदेश आ चुके हैं, लेकिन वे अभी भी अपने पुराने थानों में किंग बनकर बैठे हैं। इनकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि नई एसपी को भी इनके ‘नेटवर्क’ से टकराना पड़ेगा।स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अगर प्राची सिंह केशव कुमार वाली ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती हैं और पुरानी जमी हुई लॉबी को हटाने का साहस दिखाती हैं, तो जनपद फिर अपराध मुक्त हो सकता है। लेकिन अगर वे भी पुराने तंत्र के सामने झुक गईं, तो केशव कुमार का सारा सुधार धरा-धरा रह जाएगा।जनता अब प्राची सिंह की पहली बड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रही है। क्या वे साबित करेंगी कि महिला पुलिस अधिकारी भी पुरुष अधिकारियों से ज्यादा सख्त और निष्पक्ष हो सकती है? या फिर ‘अभिजीत-शंकर युग’ वाला अपराध ग्राफ और बढ़ता जाएगा?जनपदवासी सतर्क नजर रखे हुए हैं।अब देखना यह है – नई एसपी प्राची सिंह ‘केशव कुमार 2.0’ बन पाएंगी या पुरानी व्यवस्था की कैदी बन जाएंगी?
समय ही बताएगा।
*Devashish Govind Tokekar*
*INDIAN PRESS UNION*
*District Reporter*