जिस देश थाने ऑक्शन होते हो वहां क्राइम कैसे कम होगा। समय-समय पर कई नेशनल न्यूज़ पेपर्स ने यह आवाज उठाई है कि गुजरात बॉर्डर पर, राजस्थान के प्रतापगढ़ बॉर्डर पर जहां सबसे ज्यादा अफीम या शराब की स्मगलिंग होती है वहां के थानों की पोस्टिंग के लिए थानेदार करोड़ो रुपये तक भी देने को तैयार हो जाते हैं क्यों ?इस बात का उत्तर बताने की जरूरत नहीं है हर आदमी समझता है पर क्या रक्षक ही भक्षक बन चुका है? क्या यह अपने कर्तव्य को पैसों के हाथ बेच चुके हैं ?क्या इनका जमीन गवारा नहीं करता कि सिर्फ आपके दौलत के लालच में कितने लोगों की जिंदगियां तबाह हो जाती है? पर नहीं इन्हें क्या! ऊपर से नीचे तक बंदर बाँट होती है ।हर नीचे ऊपर अधिकारी को मलाई मक्खन वाला थाना चाहिए होता है ,तो क्या कभी इस देश में नौकरशाही जवाबदेही नहीं होगी? क्या आम आदमी इनसे कोई प्रश्न नहीं कर पाएगा ?क्या यह क्राइम को कम कर पाएंगे क्योंकि जब थाने ऑक्शन होंगे तो उसकी रिकवरी क्राइम बढ़ा कर ही होगी घटा के तो नहीं हो सकती । कुछ पुलिस अधिकारी से जो हमने पूछा तो उन्होंने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि अब तो महकमें में ईमानदार होना गुनाह है क्योंकि अगर आप ईमानदार है तो अधिकारी आपको न अच्छी पोस्टिंग देंगे और ना ही अच्छा प्रमोशन इसलिए अगर आपको मक्खन वाली अच्छी पोस्टिंग चाहिए तो ईमानदारी तो छोड़नी पड़ेगी तो क्या सरकार कभी भी नौकरशाही को जवाबदेह बनाएगी? पर हालात से तो ऐसा लगता नहीं है एक बहुत बड़ा प्रश्न है जो समय-समय पर नेशनल न्यूज़ पे खड़ा होता है?