ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान में कितने का मिल रहा LPG सिलेंडर? कीमत जान रह जाएंगे हैरान, सिर्फ इतने दिनों का बचा स्टॉक
US-Iran War: पश्चिमी एशिया के जारी संकट ने पाकिस्तान में एलपीजी और पेट्रोल-डीजल आपूर्ति संकट को गंभीर बना दिया है. पड़ोसी मुल्क में LPG की कीमतों में भी इजाफा हुआ है.
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के चलते दुनिया के ज्यादातर देशों में ऊर्जा संकट खड़ा हुआ है. भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी युद्ध का असर साफ नजर आ रहा है. पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है.
LPG सिलेंडर के बढ़े दाम
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की ओर से जारी सेंसिटिव प्राइस इंडेक्स (SPI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में 11.67 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत अभी 3150 से 3950 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3900 से 5135 रुपये तक पहुंच चुकी है.खासकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ज्यादातर शहरों में कीमतों में इजाफा देखने को मिला है.
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर
कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी देखने को मिल रहा है. रिक्शा, बस या मिनी बस जैसे वाहन जो एलपीजी से चलते हैं, उनके किराए में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले निम्न और मिडिल क्लास के लोगों की जेब ज्यादा ढीली हो रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी वजह वैश्विक है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के चलते एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आई है.
11 दिन का बचा कच्चे तेल का स्टॉक
बता दें कि पाकिस्तान की एलपीजी जरूरत करीब 20 लाख टन सालाना है, इसमें से 12 लाख टन एलपीजी दूसरे देशों से मंगवानी होती है, जबकि 8 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति घरेलू रिफाइनरी के जरिए होती है. मार्च में हालांकि करीब 20000 टन एलपीजी लेकर तीन जहाज पाकिस्तान पहुंचे, लेकिन यह आपूर्ति मांग के मुकाबले काफी कम है. ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है. हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के पास कच्चे तेल का भंडार केवल 11 दिनों के लिए ही पर्याप्त है.
पेट्रोल-डीजल और LPG का कितने दिन का बचा स्टॉक
इसके अलावा डीजल 21 दिन, पेट्रोल 27 दिन और एलपीजी सिर्फ 9 दिन और जेट फ्यूल 14 दिन के लिए उपलब्ध है. पाकिस्तान अपनी लगभग 70 प्रतिशत पेट्रोलियम जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर है. पश्चिमी एशिया के मौजूदा हालात के चलते शिपिंग रूट और सप्लाई चेन प्रभावित हुआ है. इसके चलते स्थिति और गंभीर हो गई है. सरकार अब ईरान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति की अनुमति को लेकर बातचीत कर रही है, जिससे कुछ राहत मिल सकती है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर एलएनजी की आपूर्ति में बाधा जारी रही, तो 14 अप्रैल के बाद देश को गंभीर गैस संकट का सामना करना पड़ सकता है.