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आस्था के महाकुंभ पर शातिरों की नजर और ‘एआई’ का अचूक वार, ​आस्था के महासंगम में ‘आधुनिक सर्विलांस’ की विजय,

By VIJAY KUMAR • 2026-10-03 04:03 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
आस्था के महाकुंभ पर शातिरों की नजर और ‘एआई’ का अचूक वार, ​आस्था के महासंगम में ‘आधुनिक सर्विलांस’ की विजय,

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
2अक्टूबर 2026,
गयाजी : ​मोक्षधाम गयाजी में जब लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों के उद्धार और मोक्ष की कामना लिए तर्पण और पिंडदान में लीन थे, ठीक उसी वक्त दूसरे राज्यों से आया एक संगठित सिंडिकेट उनकी आस्था, ध्यान और भावनाओं को लूटने में जुटा था।

रोज़ाना लाखों की भीड़ का फायदा उठाकर श्रद्धालुओं के कीमती मोबाइल पार करने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह की चालाकी तब धरी की धरी रह गई, जब पुलिस की मुस्तैदी और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) की तीसरी आंख ने इनके हर कदम को बेनकाब कर दिया।

एसएसपी सुशील कुमार के नेतृत्व में गया पुलिस द्वारा 8 शातिर अपराधियों की गिरफ्तारी, 44 मोबाइल और नकदी की बरामदगी निसंदेह एक बड़ी कामयाबी है।
लेकिन यह घटना जितनी पुलिस की सफलता की कहानी कहती है, उससे कहीं अधिक हमारे समाज की नागरिक जिम्मेदारियों और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था के नए आयामों पर सोचने को विवश करती है।

​जब आस्था बनी ढाल और तकनीक बनी काल :
​पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सांसारिक चिंताओं से दूर ईश्वर और पितरों की आराधना में खोए रहते हैं।
अपराधियों ने इसी एकाग्रता और विश्वास को अपनी ढाल बनाया। आसनसोल और धनबाद से पहुंचे इस गिरोह का तरीका बेहद पेशेवर था—भीड़ में एक व्यक्ति मोबाइल निकालता, तुरंत दूसरे को सौंपता और दूसरा तीसरे के हवाले कर देता।

मकसद साफ था: अगर कोई पकड़ा भी जाए, तो उसके पास से कुछ न मिले।
​किंतु इस बार पुलिस ने पुरानी लकीर पीटने के बजाय तकनीक को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के साथ एआई-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम ने भीड़ के बीच संदिग्धों के चेहरे, चाल-ढाल और मूवमेंट पैटर्न को ट्रैक कर उस नेटवर्क की जड़ पर प्रहार किया।

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि 21वीं सदी के शातिर अपराधों से निपटने के लिए स्मार्ट पुलिसिंग अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

​मकान मालिकों की लापरवाही:
चंद रुपयों के लिए सुरक्षा से खिलवाड़,
​इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक और कड़वा पहलू कोतवाली थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड स्थित उस मकान से जुड़ा है, जहाँ ये अपराधी शरण लिए हुए थे।

चंद रुपयों के लालच में मकान मालिक ने किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराना जरूरी नहीं समझा। बिना सत्यापन के संदिग्धों को कमरा देना न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि शहर की आंतरिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है।

​प्रशासन द्वारा मकान मालिक पर प्राथमिकी दर्ज करने का कदम कड़ा, लेकिन अत्यंत आवश्यक संदेश है। धार्मिक मेलों या भीड़भाड़ वाले अवसरों पर स्थानीय नागरिकों को यह समझना होगा कि सुरक्षा सिर्फ वर्दीधारियों की जिम्मेदारी नहीं है; हर नागरिक की सतर्कता ही किसी बड़े अपराध या अनहोनी को टालने की पहली दीवार होती है।

​मानवीय पुलिसिंग का अनुकरणीय उदाहरण:
​अक्सर पुलिस पर आरोप लगते हैं कि बरामद सामान थानों के मालखाने में सालों धूल फांकता रह जाता है। ऐसे में गया पुलिस का यह निर्णय अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है कि जो श्रद्धालु अपने घरों को लौट चुके हैं, उनके बरामद मोबाइल कूरियर के जरिए उनके पते तक पहुंचाए जाएंगे।

यह संवेदनशीलता न केवल पुलिस की छवि को जनता के बीच मजबूत करती है, बल्कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के मन में कानून और व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास भी जगाती है।

​अंतिम निष्कर्ष :
​गया में हुआ यह भंडाफोड़ अपराधियों के लिए साफ चेतावनी है कि आस्था के केंद्रों को अपनी अवैध कमाई का जरिया बनाने वालों के लिए अब बच निकलना नामुमकिन है।
आधुनिक तकनीक, सजग पुलिस और जवाबदेह नागरिकता—यही त्रिवेणी आने वाले समय में ऐसे महाकुंभों और धार्मिक आयोजनों को पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध बना सकती है।

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