"गयाजी में आस्था का महाकुंभ और सुशासन का आधुनिक प्रतिमान"
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
गयाजी : पितृपक्ष महासंगम 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु गयाजी पहुंच रहे हैं। इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन, तकनीकी सुविधाओं और तीर्थयात्रियों की सहायता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की खबरें सामने आई हैं।
प्रेतशिला, रामशिला, सीताकुंड, देवघाट और विष्णुपद मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच भीड़ प्रबंधन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सहायता, ठहरने की व्यवस्था और अन्य सेवाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इस वर्ष के आयोजन में तकनीक का उपयोग भी चर्चा में है। विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले श्रद्धालुओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अनुवाद तकनीक के जरिए मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, बुजुर्गों और बच्चों की पहचान एवं सुरक्षा में सहायता के लिए रिस्टबैंड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके अलावा, ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ जैसी पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल में पितरों की स्मृति को पौधारोपण से जोड़कर प्रकृति के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया है।
गयाजी का पितृपक्ष महासंगम धार्मिक आस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं, तकनीकी सहायता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों का भी उदाहरण बन रहा है। आयोजन के अनुभव भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।