काशी टैक्स कॉन्क्लेव 2026 अध्यात्म से अध्ययन तक - एआई से जीएसटी तक उठे सवाल, अध्यात्म की नगरी में कर कानून पर हुआ तीन दिवसीय मंथन
वाराणसी, 5 अक्टूबर 2026।
अध्यात्म और ज्ञान की नगरी काशी में आयोजित काशी टैक्स कॉन्क्लेव–2026 में आयकर, जीएसटी, कर प्रशासन, न्यायपालिका एवं बार के संबंध तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव सहित कर कानून से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर देशभर से आए विशेषज्ञों ने गहन मंथन किया।
कॉन्क्लेव का आयोजन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स (AIFTP) के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कर कानून केवल राजस्व संग्रह का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राज्य, नागरिक और अर्थव्यवस्था के बीच विश्वास का महत्वपूर्ण सेतु है। संस्था के 50 वर्षों की यात्रा को उपलब्धियों के उत्सव के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने और आत्ममंथन का अवसर भी बताया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति श्री पीयूष अग्रवाल, माननीय न्यायमूर्ति श्री इंद्रजीत शुक्ला, AIFTP के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वेंकट रमणी, इनकम टैक्स बार एसोसिएशन वाराणसी के अध्यक्ष श्री संजय कुमार वर्मा, महामंत्री श्री वरुण कुमार सिंह तथा अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने कहा कि न्यायपालिका और बार एक ही रथ के दो पहिए हैं। कर कानून जैसे जटिल क्षेत्र में अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का शोध, तथ्यों का सही प्रस्तुतीकरण और विधिक विश्लेषण न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय का विकल्प नहीं है। किसी भी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक निर्णय में मानवीय विवेक और कारणयुक्त विचार आवश्यक हैं।
न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला ने कहा कि बदलते आर्थिक और विधिक परिवेश में कर कानून एवं अनुपालन प्रक्रियाएं लगातार बदल रही हैं। ऐसे में कर पेशेवरों को अपने ज्ञान को लगातार अपडेट करना होगा।
एआई से ड्राफ्टिंग आसान, सत्यापन जरूरी
AIFTP के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकट रमणी ने कहा कि एआई अब पेशेवर कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। हालांकि एआई से तैयार नोटिस या जवाब को बिना परीक्षण स्वीकार करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एआई को ज्ञान का विकल्प नहीं, बल्कि पेशेवर दक्षता बढ़ाने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
तकनीकी सत्र में प्रीत गुप्ता ने बताया कि एआई की मदद से नोटिस के जवाब, अपील के Grounds of Appeal, Statement of Facts सहित कई प्रकार के ड्राफ्ट कम समय में तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन अंतिम रूप देने से पहले तथ्यों और कानून का पेशेवर स्तर पर सत्यापन जरूरी है।
जीएसटी में आईटीसी के मुद्दे पर चर्चा
जीएसटी विशेषज्ञ सीए बिमल जैन ने CGST Act की धारा 16(2)(c) से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि खरीदार ने वास्तविक खरीद की और सप्लायर को जीएसटी सहित पूरा भुगतान कर दिया, लेकिन सप्लायर ने सरकार के पास टैक्स जमा नहीं किया, तो खरीदार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रश्न गंभीर कानूनी विमर्श का विषय है।
उन्होंने धारा 74 के तहत कर और पेनल्टी की कार्यवाही तथा अपील में प्री-डिपॉजिट से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी चर्चा की।
ट्रस्ट और आयकर कानून पर भी चर्चा
कर विशेषज्ञ डॉ. गिरीश आहूजा ने ट्रस्ट एवं आयकर कानून में हुए बदलावों पर जानकारी दी। उन्होंने ट्रस्ट के पंजीकरण, विदेशी अंशदान, 80G और वैधानिक अनुपालन से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते कानून के साथ कर पेशेवरों को तकनीकी बदलावों की जानकारी भी रखना जरूरी है।
दूसरे दिन जगदीश पंजाबी ने आयकर असेसमेंट, धारा 142 एवं 142(1) के नोटिस और पेनल्टी संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी। अनिल कुमार श्रीवास्तव ने विदेशी आय एवं विदेशी परिसंपत्तियों के सही प्रकटीकरण तथा Foreign Tax Credit और Double Taxation Relief से जुड़े प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
काशी की ज्ञान परंपरा से तकनीक तक
कॉन्क्लेव में वक्ताओं ने कहा कि काशी सदियों से ज्ञान और चिंतन की भूमि रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कर पेशेवरों को बदलते कानून और तकनीक के साथ निरंतर सीखना होगा।
कॉन्क्लेव में इनकम टैक्स बार एसोसिएशन वाराणसी के अध्यक्ष संजय कुमार वर्मा, महामंत्री वरुण कुमार सिंह, उपाध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव, कॉन्फ्रेंस चेयरमैन असीम जफर, एडवाइजर अरविंद शुक्ला और को-चेयरमैन ओपी शुक्ला समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कॉन्क्लेव का मुख्य संदेश रहा कि एआई भविष्य की आवश्यकता है, लेकिन कानून और तथ्यों पर अंतिम निर्णय पेशेवर के ज्ञान, अनुभव और विवेक से ही होना चाहिए।