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तीसरी बार JCB से खुदाई के आरोप से गरमाया कोसली मठ का मामला, ग्रामीणों ने DGP विजिलेंस से मांगी जांच

By HOSHIAR SINGH • 2026-10-01 04:29 • 9 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
तीसरी बार JCB से खुदाई के आरोप से गरमाया कोसली मठ का मामला, ग्रामीणों ने DGP विजिलेंस से मांगी जांच

कोसली मठ-मंदिर परिसर में प्राचीन धार्मिक धरोहर से कथित छेड़छाड़, ग्रामीणों ने विजिलेंस जांच की मांग की

इंडियन प्रेस यूनियन | कोसली | होशियार सिंह

बाबा मुक्तेश्वरपुरी मठ-मंदिर परिसर में प्राचीन तपोभूमि, चेतन धूने और धार्मिक धरोहर से कथित छेड़छाड़ का मामला अब विजिलेंस जांच की मांग तक पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मठ परिसर में JCB से खुदाई के दौरान चेतन धूने तथा पुराने वटवृक्ष सहित धार्मिक स्थल से जुड़ी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग ग्रामीणों ने की है।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने माननीय DGP विजिलेंस को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की जांच विजिलेंस शाखा से करवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मठ की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े स्थानों पर किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले संबंधित नियमों और प्रशासनिक अनुमति का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक, 23 सितंबर 2018 को भी बाबा शिवपुरी और मठ कमेटी से जुड़े कुछ सदस्यों पर प्राचीन तपोभूमि और चेतन धूने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। ग्रामीणों ने उस समय भी विरोध जताया था। वर्ष 2018 में प्रकाशित अखबार की तस्वीर भी ग्रामीणों की ओर से इस घटना के संदर्भ में प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में फिर JCB से खुदाई के कारण चेतन धूने और धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और धार्मिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बाबा शिवपुरी, मठ कमेटी/ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों तथा सरपंच रामकिशन जांगड़ा के खिलाफ अभी तक अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का पक्ष भी जांच के दौरान सामने आना बाकी है।

गौरतलब है कि उपायुक्त रेवाड़ी ने 9 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर कोसली मठ-मंदिर की चल-अचल संपत्ति की देखरेख के लिए SDM कोसली को प्रशासक नियुक्त किया था। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासक की जिम्मेदारी के बावजूद मठ परिसर में धार्मिक धरोहर से जुड़े कार्यों को लेकर सवाल उठना जांच का विषय है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मठ-मंदिर की प्राचीन धार्मिक धरोहर और संबंधित स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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