'सॉवरेन गारंटी' का सुरक्षा कवच: एलआईसी की विश्वसनीयता और भारतीय वित्तीय व्यवस्था का आधारस्तंभ,
एलआईसी की धारा 37 और सॉवरेन गारंटी: पॉलिसीधारकों के लिए क्या है प्रावधान?
लेखक: विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
गयाजी: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) दशकों से देश में जीवन बीमा और बचत से जुड़ी एक प्रमुख सार्वजनिक संस्था रही है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर एलआईसी की पॉलिसियों को लेकर भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी से संबंधित चर्चा फिर सामने आई है। ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि LIC Act, 1956 की धारा 37 इस संबंध में क्या प्रावधान करती है।
कानूनी आधार: LIC Act की धारा 37
LIC Act, 1956 की धारा 37 के तहत निगम द्वारा जारी पॉलिसियों की बीमित राशि (Sum Assured) और घोषित बोनस के भुगतान के संबंध में केंद्र सरकार की गारंटी का प्रावधान है। यह प्रावधान अधिनियम में दी गई संबंधित शर्तों के अधीन लागू होता है।
सरल शब्दों में, धारा 37 LIC की पॉलिसियों की बीमित राशि और घोषित बोनस के भुगतान के लिए केंद्र सरकार की वैधानिक गारंटी से संबंधित है। इसे सभी प्रकार के निवेश लाभ या हर परिस्थिति में होने वाले वित्तीय नुकसान की पूर्ण गारंटी के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।
सार्वजनिक और निजी बीमा क्षेत्र का अंतर
LIC एक वैधानिक सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा संस्था है, जबकि निजी बीमा कंपनियां भी बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के नियामकीय एवं शोधन क्षमता संबंधी नियमों के तहत काम करती हैं। LIC की विशिष्टता यह है कि उसकी पॉलिसियों की बीमित राशि और घोषित बोनस के संबंध में LIC Act की धारा 37 में केंद्र सरकार की वैधानिक गारंटी का प्रावधान मौजूद है।
LIC का IPO और कानूनी प्रावधान
LIC के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भी LIC Act में धारा 37 का प्रावधान बना हुआ है। हालांकि, इस प्रावधान को समझते समय अधिनियम की अन्य लागू धाराओं और संबंधित शर्तों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
सरकारी उत्तर में भी किया गया उल्लेख
10 फरवरी 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था कि LIC की सभी पॉलिसियों की बीमित राशि और घोषित बोनस भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी से समर्थित हैं। यह गारंटी LIC Act, 1956 की धारा 37 के प्रावधानों से संबंधित है।
इसलिए सोशल मीडिया पर LIC की सॉवरेन गारंटी को लेकर होने वाली चर्चाओं को समझते समय धारा 37 के वास्तविक कानूनी दायरे और उसमें लागू शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
LIC Act, 1956 की धारा 37 LIC की पॉलिसियों की बीमित राशि और घोषित बोनस के भुगतान के संबंध में केंद्र सरकार की वैधानिक गारंटी का प्रावधान करती है। हालांकि, इसे सभी प्रकार के वित्तीय जोखिम या निवेश संबंधी नुकसान की असीमित गारंटी के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
LIC की सॉवरेन गारंटी से जुड़े दावों को समझने के लिए अधिनियम की धारा 37 और उससे संबंधित लागू प्रावधानों को देखना आवश्यक है।