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प्रतापगढ़: राज्यसभा चुनाव में फिर किंगमेकर की भूमिका में राजा भैया!

By LOK NATH PANDEY • 2026-10-03 03:49 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
प्रतापगढ़: राज्यसभा चुनाव में फिर किंगमेकर की भूमिका में राजा भैया!
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राज्यसभा चुनाव में राजा भैया की भूमिका पर बढ़ी सियासी दिलचस्पी, दो विधायकों के समर्थन पर नजर

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव ने एक बार फिर कुंडा विधायक एवं जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ को प्रदेश की सियासत में चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विधानसभा में पार्टी के दो विधायक हैं, लेकिन मौजूदा चुनावी गणित में उनके समर्थन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से राजनीतिक दलों की निगाहें राजा भैया के रुख पर टिकी हैं।

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में अतिरिक्त सीटों के लिए होने वाली राजनीतिक कवायद में प्रत्येक वोट का महत्व बढ़ जाता है। एनडीए और विपक्ष के बीच संभावित समीकरणों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

इसी बीच जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायक चुनावी गणित में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पार्टी एनडीए का औपचारिक हिस्सा नहीं है, हालांकि पिछले राज्यसभा चुनाव में राजा भैया ने भाजपा के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया था। इस बार उनके दोनों विधायकों के समर्थन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।

राजा भैया की राजनीतिक भूमिका केवल विधानसभा में पार्टी के दो विधायकों तक सीमित नहीं मानी जाती। वह 1993 से लगातार कुंडा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन किया था। वर्तमान विधानसभा में पार्टी के दो विधायक हैं और विधान परिषद में भी उसका प्रतिनिधित्व है।

राज्यसभा चुनाव के बहाने एक बार फिर छोटे दलों के सीमित संख्या बल की राजनीतिक भूमिका चर्चा में है। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी राजा भैया के रुख को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी, दोनों खेमों में सक्रियता देखी गई थी। इस बार परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन जनसत्ता दल के विधायकों के समर्थन को लेकर दिलचस्पी बनी हुई है।

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजा भैया की पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संभावित गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव में उनका रुख तत्कालीन चुनावी गणित के साथ-साथ भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

जनसत्ता दल के वरिष्ठ नेता एवं विधान परिषद सदस्य कुंवर अक्षय प्रताप सिंह ‘गोपाल जी’ ने कहा कि राजा भैया के साथ केवल दो वोट जोड़कर देखना उचित नहीं है। उन्होंने पिछले चुनावों के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा भैया जिस पक्ष के साथ होंगे, जीत उसी की होगी। यह उनका राजनीतिक आकलन है, न कि चुनाव परिणाम की पुष्टि।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि राजा भैया राज्यसभा चुनाव को लेकर अपना रुख कब स्पष्ट करते हैं। मौजूदा संख्या बल में उनके दोनों विधायकों का समर्थन राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति मतदान और आधिकारिक परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।

संपादकीय टिप्पणी: चुनावी आंकड़ों, मतदान कार्यक्रम और नेताओं के बयानों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक स्रोतों से की जानी चाहिए।

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