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सत्य की मुखर आवाज़ का मौन होना — देवव्रत मंडल जी को नमन!

By VIJAY KUMAR • 2026-09-22 07:17 • 5 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
सत्य की मुखर आवाज़ का मौन होना — देवव्रत मंडल जी को नमन!

विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

गयाजी : ​गया की पत्रकारीय विरासत में जब भी निर्भीक, निष्पक्ष और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता का उल्लेख होगा, वरिष्ठ पत्रकार देवव्रत मंडल जी का नाम आदर के साथ लिया जाएगा।
उनकी कलम केवल सूचनाओं का लेन-देन नहीं करती थी, बल्कि वह सत्ता और प्रशासन के गलियारों में दबे-कुचले लोगों की आवाज़ बनकर गूँजती थी।
उनका असामयिक निधन न केवल गया जिले, बल्कि समूचे बिहार के स्वतंत्र पत्रकारीय फलक पर एक गहरा घाव छोड़ गया है।

​जनसरोकार और निष्पक्षता की मिसाल :
आज का मीडिया परिदृश्य जब सनसनीखेज खबरों और जल्दबाजी के दबाव में अपनी विश्वसनीयता तलाश रहा है, तब देवव्रत मंडल जी जैसे पत्रकार पुरानी परंपरा की वो मशाल थे जो धैर्य, तथ्य और जनहित के सिद्धांतों पर कभी समझौता नहीं करते थे।
उन्होंने ज़मीनी हकीकत को बिना किसी लाग-लपेट के सामने रखा।
एक सक्रिय पत्रकार के साथ-साथ वे एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे, जिन्होंने कलम के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को मुख्यधारा तक पहुँचाया।

​प्रशासनिक संवेदनशीलता और अपूरणीय शून्यता :
ज़िला प्रशासन द्वारा व्यक्त की गई गहरी शोक संवेदना इस बात का प्रमाण है कि उनका प्रभाव केवल अखबारों के पन्नों तक नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी सकारात्मक रूप से सजग रखने में था।
जब प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी किसी पत्रकार के जाने पर 'अपूरणीय क्षति' महसूस करता है, तो यह स्पष्ट होता है कि वह पत्रकार आलोचना और संवाद दोनों में कितना विश्वसनीय और सम्मानित था।

​कलम मौन हुई, विचार जीवित रहेंगे :
देवव्रत मंडल जी का जाना पत्रकारिता के एक समर्पित अध्याय का समापन है।
शारीरिक रूप से भले ही वे हमारे बीच न हों, लेकिन सत्य के प्रति उनकी निष्ठा, बेबाक तेवर और समाज के प्रति उनका समर्पण नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए हमेशा एक प्रकाशस्तंभ का कार्य करेगा।

​ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोक संतप्त परिवार व शुभचिंतकों को इस अपार दुख को सहने का संबल प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि!

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