ज़मीनी विवादों पर प्रशासन का 'ऑन-द-स्पॉट' प्रहार: गया में डीएम शशांक शुभांकर की दो-टूक कार्यशैली ने तय की जवाबदेही,
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
7 अक्टूबर 2026
गया जी: प्रशासनिक कार्यप्रणाली अक्सर फाइलों के बोझ और तारीख-पर-तारीख की प्रक्रिया में उलझ जाती है, लेकिन जब जिले का प्रमुख स्वयं जनसमस्याओं के सीधे निपटारे के लिए बैठता है, तो मामलों के समाधान में तेजी आ सकती है।
बुधवार, 07 अक्टूबर 2026 को गया समाहरणालय में जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभांकर की अध्यक्षता में आयोजित द्वितीय अपीलीय प्राधिकार की बैठक में 10 मामलों की सुनवाई की गई। बैठक के दौरान कई मामलों में मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
1. सीमांकन के बाद भी कब्जा?
बोधगया अंचल के बारा निवासी राजेश सिंह के मामले में जमीन की मापी और सीमांकन के बावजूद कब्जे को लेकर शिकायत सामने आई। मामले पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने अंचलाधिकारी बोधगया को परिवादी की मौजूदगी में पिलरिंग (सीमांकन स्तंभ) कराने का निर्देश दिया।
2. निजी विवाद और लोक अतिक्रमण में स्पष्ट अंतर
मानपुर अंचल के भूसंडा निवासी हरे राम द्वारा उठाए गए कथित 'लोक भूमि अतिक्रमण' के मामले में सुनवाई के दौरान अंचलाधिकारी ने बताया कि विवादित जमीन सार्वजनिक नहीं, बल्कि रैयती खाते की है।
जिला पदाधिकारी ने मामले में परिवादी को सक्षम दीवानी न्यायालय में जाने की सलाह दी। इससे संबंधित पक्ष को उचित विधिक मंच के बारे में जानकारी मिली।
3. प्रशासनिक आदेशों की गरिमा और कानूनी विकल्प
डुमरिया के गोपाल सिंह के मकान व भूमि दखल विवाद में, जहां अपर समाहर्ता के न्यायालय द्वारा पहले ही आदेश पारित किया जा चुका था, आवेदक के असंतोष पर डीएम ने उन्हें सक्षम अपीलीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।
विश्लेषण: जनसुनवाई से 'जनविश्वास' की बहाली
बिहार में भूमि विवाद लंबे समय से प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती रहे हैं। ऐसे में द्वितीय अपीलीय प्राधिकार जैसे मंच आम जनता को अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखने और उचित विधिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर देते हैं।
गया जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं:
अंचल स्तर पर तत्परता: जनता को छोटी-छोटी पैमाइश और पिलरिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
सटीक विधिक मार्गदर्शन: जनता को यह स्पष्ट करना कि कौन सा मामला प्रशासनिक स्तर पर और कौन सा मामला दीवानी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
'ऑन-द-स्पॉट' समाधान: आमने-सामने की सुनवाई के माध्यम से मामलों में आवश्यक कार्रवाई को गति देना।
निष्कर्ष:
गया जिला प्रशासन की इस बैठक में 10 मामलों की सुनवाई और उनमें आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। अब आवश्यकता इस बात की है कि मामलों के निर्देशों का अनुपालन प्रखंड और अंचल स्तर पर भी समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए।