नवी मुंबई : नवी मुंबई में ठाणे-बेलापुर रूट पर यात्रा को सिग्नल फ्री बनाने के मकसद से एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के तहत रूट पर राबाले, पावने और तुरभे में फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।जबकि पाम बीच रोड पर ‘एंड ऑफ जंक्शन’ के नजदीक विशेष रूप से नगर निगम मुख्यालय के पास एक ट्विन-टनल अंडरपास बनाया जाएगा। इस प्रस्ताव को सोमवार को हुई आम सभा की बैठक के दौरान मंजूरी मिली। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है कि एक बार यह परियोजना शुरू हो जाने के बाद यात्रियों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
नगर निगम में सदन के नेता सागर नाइक ने आम सभा की बैठक के दौरान दो प्रस्ताव पेश किए। एक परियोजना के 30:70 लागत-साझाकरण चरण के संबंध में और दूसरा पुल निर्माण कार्यों के लिए एक तकनीकी सलाहकार की नियुक्ति के संबंध में। इन मामलों पर चर्चा के बाद महापौर सुजाता पाटिल ने अपनी मंजूरी दे दी। वर्तमान में ठाणे-बेलापुर रूट पर ट्रैफिक काफी बढ़ गया है। इससे सुबह और शाम के व्यस्त घंटों के दौरान गंभीर ट्रैफिक जाम की समस्याएं पैदा हो रही हैं। ट्रैफिक में इस वृद्धि का मुख्य कारण नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, अटल सेतु के साथ ही वाशी और ऐरोली में क्रीक कनेक्टर पुल हैं।
इसके अलावा पूरे शहर में बड़े पैमाने पर पुनर्विकास परियोजनाएं चल रही हैं। इसके चलते सागर नाइक ने जोर देकर कहा कि भविष्य की प्रभावी ट्रैफिक योजना के लिए फ्लाईओवर और ट्विन अंडरपास का निर्माण जरूरी है। सत्ताधारी दल के पार्षदों ने इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया। हालांकि प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने कई आपत्तियां उठाईं। अन्य स्थानों पर फ्लाईओवर निर्माण में अनावश्यक खर्च के उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि इस परियोजना में भी वैसी ही वित्तीय फिजूलखर्ची नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष के सदस्यों ने सदन के भीतर ठाणे-बेलापुर मार्ग पर फ्लाईओवर और अंडरपास के प्रस्ताव के संबंध में आपत्तियां उठाईं। शिवसेना पार्षद द्वारकानाथ भोईर ने उस प्रक्रियात्मक तरीके पर सवाल उठाया जिस तरह से प्रस्ताव पेश किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि सदन को तकनीकी सलाहकार की नियुक्ति या परियोजना की कुल अनुमानित लागत के संबंध में कोई विवरण प्रदान नहीं किया गया था। नतीजतन प्रस्ताव को फिर से पेश करने की मांग की गई, जिसमें इस बार परियोजना की लागत का विस्तृत विवरण शामिल हो। हालांकि अपनी संख्या बल का लाभ उठाते हुए सत्ताधारी दल ने प्रस्ताव पारित कर दिया। इसके अलावा विजय चौगुले ने पारदर्शी शासन की मांग की, और यह बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए ठेकेदार की पहचान या आवंटित की जाने वाली धनराशि के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
यह प्रोजेक्ट ‘हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल’ (HAM – 30:70) वित्तीय ढांचे के तहत लागू किया जाएगा। इस मॉडल के तहत प्रोजेक्ट की कुल लागत का 30 प्रतिशत हिस्सा शुरू में ही दे दिया जाएगा, जबकि बाकी 70 प्रतिशत हिस्सा काम पूरा होने के बाद दस साल की अवधि में किस्तों में चुकाया जाएगा। यह स्पष्ट किया गया है कि इसके परिणामस्वरूप इस व्यवस्था से नगर निगम पर कोई तत्काल वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।