मेरे इस्लाम छोड़ने के कई कारण रहे है। मैं अपनी स्वेच्छा से कई सालो से इस्लाम छोड़ चुका हूँ। मैं किसी भी धर्म के बारे में कुछ कहना नहीं चाहता पर सनातन धर्म ही जीवन जीने का एक मात्र आधार है।
हमारी भारतीय संस्कृति और सनातन ही हर एक भारतीय की पहचान है । मुझे सनातन धर्म हमेशा अच्छा लगता था और रहा है । जब मैंने सनातन धर्म को सही से जाना मेरा विश्वास सनातन धर्म में और बढ़ा ।
यहाँ अपनी मान्यता की आज़ादी है कि आप भगवान को किसी भी रूप में पूज सकते है।यहाँ भगवान को अलग अलग रूप में अपना आराध्य मान सकते है और अपने आराध्य को बिना किसी रोक टोक के पूजा जा सकता हैं ।
यहाँ अपने अनुसार अपने आराध्य भगवान को चुनने की आज़ादी हैं ।जैसे की प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी , शिव जी ,रामचंद्र जी , हनुमान जी, विष्णु जी, कृष्ण जी और देवियों में माता पार्वती जी को समस्त संसार की माता के रूप में देखा जाता हैं।माता लक्ष्मी जी को लक्ष्मी स्वरूप में पूजा जाता है जो की धन-धान्य की देवी हैं । माता सरस्वती को विद्या व ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता हैं।
इसी प्रकार यहाँ पूरे साल भर अलग अलग त्योहार आने की वजह से खुशियाँ और हर्ष उल्लास रहता हैं । हर एक त्योहार अपना महत्व रखता हैं और खुशियाँ लाता है । इन्ही खुशियों के सहारे सभी लोग अपने और अपनों के जीवन में खुशियों का अनुभव पाते हैं । पूरे साल आने वाले त्योहारों से प्रसन्नता व खुशहाल जीवन जीने का मार्ग मिलता हैं। यहाँ के त्योहारों में किसी भी ग़लत आचरण का संकेत नहीं दिया जाता जैसे की मास-मदिरा व जीव हत्या या कोई भी अमानवीय काम नहीं किया जाता हैं। इसी से प्रभावित होकर मैं सनातन धर्म की सुंदरता को समझ पाया।
यहाँ धर्म ग्रंथ भागवत गीता में ,शिव पुराण में ,रामचरितमानस में इन सभी धर्म ग्रंथों मे जन कल्याणकारी कार्य , मानव जीवन को सुधार कर के सही तरीक़े से जीने का मार्ग दर्शाया गया हैं।मुझे लगता है कि इन धर्म ग्रंथों क मुख्य अंशों को स्कूलों में सिलेबस के रूप में शामिल करना चाहिए।
सनातन धर्म की ख़ूबसूरती का पूरा विश्व सम्मान करता हैं । मैंने जैसे जाना कि पूरे विश्व में हमारे आराध्य भगवान शिव का होने और पूजने का प्रमाण हैं । हमारे आराध्य शिव भगवान देव आदि देव महादेव को पूजने के साक्ष्य आज भी संसार के अलग अलग देशों में देखने को मिले हैं । जैसे की थाईलैंड में ब्रह्मा, विष्णु,महेश व गणेश जी की पूजा की जाती हैं , बैंकॉक में गणेश जी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं ।द इंडियन डाउन अंडर के अनुसार ५ वी से ९ वी शताब्दी के बीच के काबुलशाही काल के दौरान यहाँ भगवान शिव के मुखलिंग और अन्य हिंदू देवताओं की प्रतिमाओं के साक्ष्य मिले हैं ।
॰ इंडोनेशिया के योग्याकारटा में भी नंदी जी की दुर्लभ मूर्ति ,गणेश जी और शिवलिंग मिले हैं ।
॰ वियतनाम के कैट टीएन में ४ वी से ९ वी शताब्दी के बीच के विशाल शिवलिंग की खोज की गई हैं ।
॰ रोमन साम्राज्य – रोमन संस्कृति में भी शिवलिंग की पूजा के प्रमाण मिलते हैं।
॰ मेसोपोटामिया – प्राचीन पुरातत्त्व खोजो में मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक़ क्षेत्र) में भी शिवलिंग मिले हैं।
॰ इसके अलावा कंबोडिया , आयरलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में भी शिव पूजा के प्रमाण मिलते हैं और मिलते आयेंगे।
मेरा मानना यह है कि समस्त संसार आदि अनादि काल में अपने आराध्य व इष्ट की पूजा करता आया।वक्त के साथ कई हज़ारों वर्षों में बदलाव आता गया,सोच विचार बदलते गए, पूजा पद्दति बदलती गई । समस्त संसार के पूर्वज पूजा करते आए हैं तो पूजा का महत्व सनातन धर्म में महत्वपूर्ण हैं अपने आराध्य को पूजने के लिए । मेरा मानना हैं की एक दिन समस्त संसार सनातन धर्म के अनुसार पूजा करेगा और अपने आराध्य की तरफ़ लौटेगा जैसे की मैं अपने आराध्य शिव की पूजा करता हूँ ।
~शिवन्या दानिश ~
Dedicated to my daughter ‘
Shivanya Danish’