अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में ईरान युद्ध के बारे में बोलते हुए कहा, “ईरान की नेवी ख़त्म हो गई. उनकी एयरफ़ोर्स तबाह हो गई. उनके ज़्यादातर नेता मर चुके हैं.”
ट्रंप ने ये भी कहा कि ईरान पर हमला बेहद ज़रूरी था क्योंकि वो परमाणु हथियार बनाने के बेहद क़रीब पहुंच चुका था.
ट्रंप ने अपने 19 मिनटों के संबोधन में ये दावा किया कि ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध का मक़सद पूरा होने के बेहद क़रीब है.
ट्रंप के भाषण के फ़ौरन बाद तेल की क़ीमतों में उछाल आया और एशियाई बाज़ारों में भी गिरावट दर्ज की गई.
उन्होंने कहा, “हम इसराइल का और मिडिल ईस्ट के अपने बाक़ी सहयोगियों जैसे सऊदी अरब, बहरीन, क़तर, क़ुवैत और यूएई को उनके सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करते हैं.”
ट्रंप के मुताबिक़ बिना किसी उकसावे के ईरान ने इन देशों पर हमला किया इससे साबित होता है कि वो इस इलाक़े के लिए कितना बड़ा ख़तरा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह यह संबोधन इसलिए दे रहे हैं ताकि लोगों को समझा सकें कि “एपिक फ्यूरी” अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए क्यों ज़रूरी है. अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ अपनी सैन्य कार्रवाई को ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है.
ट्रंप ने कहा कि पिछले 47 वर्षों में ईरान या उसके समर्थित समूहों ने कई चरमपंथी हमले और अन्य कार्रवाइयां कीं. उन्होंने ईरान की सत्ता को ‘हत्यारी’ बताया. उन्होंने हाल ही में देश में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई का भी उल्लेख किया, जिसमें हजारों नागरिक मारे गए थे.
उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. “मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा.”
‘ये युद्ध एक इन्वेस्टमेंट है’
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक सैन्य ताकत के रूप में अजेय है. उन्होंने इस युद्ध को अमेरिका की आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘एक सच्चा निवेश (इन्वेस्टमेंट)’ बताया.
इसके बाद उन्होंने 20वीं और 21वीं सदी के युद्धों की अवधि का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे कई वर्षों तक चले, जबकि यह संघर्ष अभी तक सिर्फ़ 32 दिनों से जारी है.
ट्रंप ने दावा किया कि अब अमेरिकी नागरिक ईरानी आक्रामकता और ‘परमाणु ब्लैकमेल’ के ख़तरे में नहीं हैं. उनके मुताबिक, अमेरिका अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध होगा.
बीबीसी के बिज़नेस रिपोर्टर पीटर हॉसकिंस के मुताबिक़ ट्रंप के संबोधन से अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार को इस बात को लेकर कोई भरोसा नहीं मिला है कि होर्मुज़ स्ट्रेट कब खुलेगा.
राष्ट्रपति के बोलना शुरू करने से पहले बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की क़ीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर थी.
संबोधन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन अब कीमत फिर ऊपर जा रही है और फिलहाल लगभग 4% बढ़कर 105.38 डॉलर पर पहुंच गई है.
होर्मुज़ स्ट्रेट ग्लोबल इकॉनमी के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया की करीब 20% ऊर्जा आपूर्ति आमतौर पर इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरती है.
28 फ़रवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह रास्ता लगभग बंद पड़ा है. ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों के जवाब में इस जलमार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों पर हमला करने की धमकी दी थी.
ट्रंप के संबोधन के बाद एशिया के प्रमुख शेयर बाज़ारों में भी गिरावट देखी जा रही है, जबकि पहले इनमें बढ़त दर्ज की गई थी.
जापान का निक्केई करीब 1.5% नीचे है, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.6% और हांगकांग का हैंग सेंग 1% पर गिरकर कारोबार कर रहे हैं. निवेशकों में यह चिंता बनी हुई है कि ट्रंप के भाषण के बावजूद ईरान युद्ध के अंत को लेकर कोई साफ संकेत नहीं मिला.
फ़रवरी के आखिर में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से एशियाई शेयर बाज़ारों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है. कभी युद्ध खत्म होने की उम्मीद से तेज़ उछाल आता है, तो कभी तनाव बढ़ने के संकेत से बिकवाली हावी हो जाती है.
एशिया इस संघर्ष के असर के लिए खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि क्षेत्र के कई बड़े देश-जैसे भारत, जापान और दक्षिण कोरिया ऊर्जा आपूर्ति के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर हैं. ऐसे में युद्ध बढ़ने या तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका सीधे बाज़ारों पर दबाव डालती है.
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन की वरिष्ठ सलाहकार रह चुकीं मेलिसा टूफ़ेनियन ने बीबीसी से कहा कि ट्रंप के भाषण के बाद अमेरिकी दर्शक ईरान युद्ध को लेकर शायद और ज्यादा उलझन में हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि आज वह भाषण देखने वाला कोई भी अमेरिकी यह महसूस करेगा कि कोई साफ़ योजना है, कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं है, या हम पहले से ज्यादा सुरक्षित और संरक्षित हैं.”
वहीं नेटो में अमेरिका के पूर्व राजदूत ईवो डाल्डर ने कहा कि ट्रंप के भाषण से कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिले.
इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ट्रंप का दावा है कि ईरान की परमाणु क्षमता, नौसेना और मिसाइल सिस्टम तबाह हो चुके हैं, तो फिर अमेरिका अब भी ईरान में सैन्य कार्रवाई क्यों कर रहा है.
उन्होंने बीबीसी संवाददाता सुमी सोमास्कंदा से कहा, “मुझे नहीं लगता कि इससे हम ज़्यादा सुरक्षित हुए हैं… और मुझे लगता है कि अमेरिकी जनता के मन में भी इसी तरह का संदेह है.”
डाल्डर का कहना है कि इस भाषण में ट्रंप ने नेटो सहयोगियों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया और न ही गठबंधन से बाहर निकलने की धमकियों को दोहराया, लेकिन संभावना है कि वह बाद में सोशल मीडिया पर ऐसा रुख फिर दिखा सकते हैं.