मुंबई : महाराष्ट्र सरकार को छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 किलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित करने का आधिकारिक प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ के तहत इन स्थलों को पिछले वर्ष देश के 44वें विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी। इन 12 ऐतिहासिक स्थलों में महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग किले शामिल हैं, जबकि तमिलनाडु का जिंजी किला भी इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मान्यता को महाराष्ट्र की जनता और दुनिया भर के शिव भक्तों के लिए गर्व और आनंद का क्षण बताया। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया और यूनेस्को में भारत के राजदूत विशाल शर्मा के प्रयासों की सराहना की। राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने फ्रांस में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में यूनेस्को के संस्कृति विभाग के सहायक महानिदेशक अर्नेस्टो रेनाटो ओटोन रामिरेज़ से यह प्रमाण पत्र प्राप्त किया। गौरतलब है कि 19 फरवरी, 1630 को जन्मे छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक छह जून, 1674 को रायगढ़ किले में हुआ था, जहाँ उन्होंने ‘हिंदवी स्वराज्य’ की नींव रखी थी। यह प्रमाणपत्र मराठा साम्राज्य की अदम्य वीरता और उनके उत्कृष्ट सैन्य कौशल का वैश्विक सम्मान है। यूनेस्को के नामांकन डोजियर के अनुसार, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले ये 12 स्थल मराठा शासन की रणनीतिक सैन्य दृष्टि को दर्शाते हैं। करीब 17वीं और 19वीं शताब्दी के बीच विकसित किलों का यह नेटवर्क सह्याद्रि पर्वतमाला, कोंकण तट, दक्कन के पठार और पश्चिमी घाट के परिदृश्य और इलाके के साथ किलेबंदी एक खास प्रणाली का प्रदर्शन करता है। यह प्रणाली न केवल सुरक्षा के लिहाज से बेजोड़ थी, बल्कि यह तत्कालीन इंजीनियरिंग का भी अद्भुत नमूना है। महाराष्ट्र के 390 से अधिक किलों में से केवल 11 का चयन इस विशेष श्रेणी के लिए किया गया, जबकि एक किला तमिलनाडु से चुना गया। इनमें से आठ किले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित हैं। यूनेस्को ने अपने बयान में कहा है कि मराठों द्वारा बनाए या विस्तारित किए गए ये किले एक जटिल रक्षा नेटवर्क थे, जिसने सैन्य प्रभुत्व, व्यापार की सुरक्षा और क्षेत्रीय नियंत्रण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी सैन्य शक्ति के बल पर मराठा एक प्रमुख राजनीतिक और सैन्य शक्ति के रूप में उभरे थे।