उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल शुरू हुई है। राज्य सरकार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की आपत्तियों को दूर करते हुए अब एक संशोधित और नया प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है।
नीचे इस विषय पर एक विस्तृत लेख दिया गया है:
यूपी में स्थायी DGP की नियुक्ति: यूपीएससी को दोबारा भेजा जाएगा प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों से चली आ रही ‘कार्यवाहक डीजीपी’ की परंपरा को समाप्त करने की दिशा में योगी सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा राज्य सरकार के पुराने प्रस्ताव को लौटाए जाने के बाद, अब गृह विभाग 2025 के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित पैनल भेजने की तैयारी कर चुका है।
मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति
प्रस्ताव क्यों लौटाया गया: मार्च 2026 में यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए आईपीएस अधिकारियों के पैनल को यह कहते हुए वापस कर दिया था कि यह पुराने फॉर्मेट पर आधारित था और इसमें 2025 के नए नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था।
नए प्रस्ताव की तैयारी: सूत्रों के अनुसार, संशोधित प्रस्ताव में 1990 से 1994 बैच तक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल किए जा रहे हैं। इसमें अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और शेष कार्यकाल की विस्तृत जानकारी दी गई है।
कार्यवाहक डीजीपी का दौर: मई 2022 में मुकुल गोयल के हटने के बाद से यूपी में लगातार पांच कार्यवाहक डीजीपी (डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और वर्तमान में राजीव कृष्ण) नियुक्त किए गए हैं।
नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह मामले’ के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है:
राज्य सरकार योग्य अधिकारियों की एक सूची यूपीएससी को भेजती है।
यूपीएससी वरिष्ठता और रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों का एक पैनल तैयार कर वापस राज्य को भेजता है।
राज्य सरकार उन तीन नामों में से किसी एक को स्थायी डीजीपी के रूप में चुनती है।
चर्चा में प्रमुख नाम
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण (1991 बैच) सरकार की पसंद बने हुए हैं। उनके अलावा पीयूष आनंद और पीसी मीणा जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी रेस में बताए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति न केवल प्रशासनिक स्थिरता के लिए जरूरी है, बल्कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी यह एक निर्णायक कदम होगा। यदि इस बार यूपीएससी द्वारा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो उत्तर प्रदेश को जल्द ही अपना पूर्णकालिक पुलिस मुखिया मिल जाएगा।
नोट: सुप्रीम कोर्ट ने हाल के आदेशों में राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे कार्यवाहक डीजीपी के सहारे पुलिस विभाग न चलाएं और जल्द से जल्द स्थायी नियुक्तियां सुनिश्चित करें।