March 24, 2026

अमेरिका-ईरान बातचीत में पाकिस्तान निभा सकता है मध्यस्थ की भूमिका

ईरान जंग को ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान संभावित मध्यस्थ के तौर पर उभर सकता है.

इसी कोशिश के तहत, पाकिस्तान ने कथित तौर पर प्रस्ताव दिया है कि अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ नेताओं की बैठक राजधानी इस्लामाबाद में कराई जाए.

हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि न तो अमेरिका की ओर से हुई है और ना ही ईरान की तरफ़ से. लेकिन अमेरिका के कई आला अधिकारियों के मुताबिक़ पाकिस्तान का मध्यस्थ के तौर पर उभरना बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं है.

पाकिस्तान के ईरान के साथ करीबी संबंध हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान शहबाज़ शरीफ़ सरकार के अमेरिकी प्रशासन से भी रिश्ते गर्मजोशी भरे रहे हैं.
पाकिस्तान के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस फोर्सेज आसिम मुनीर ने पिछले साल जून और सितंबर में ट्रंप से मुलाक़ात की थी.सितंबर की यात्रा के दौरान, जनरल मुनीर के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ भी मौजूद थे.

पाकिस्तान ने भारत के साथ झड़पों के दौरान मध्यस्थता की ट्रंप की कोशिशों के लिए पिछले साल जून और अक्तूबर में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित भी किया था.

शरीफ़ का यह कदम ट्रंप प्रशासन के कई लोगों को काफी पसंद आया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की है.

शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मैंने अपने भाई राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान से बात की और उन्हें ईद-उल-फ़ितर और नवरोज़ की शुभकामनाएं दीं.”

उन्होंने लिखा, “एक पड़ोसी और भाईचारे वाले देश के तौर पर, मैंने पाकिस्तान की तरफ़ से बहादुर ईरानी लोगों के साथ खड़े होने की बात कही. मैंने क़ीमती जानों के जाने पर गहरी संवेदना जताई और घायल और बेघर हुए लोगों के जल्दी ठीक होने की दुआ की.”

“हमने खाड़ी क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि तनाव कम करने, बातचीत करने और समझदारी से हल निकालने की तुरंत ज़रूरत है.”

शहबाज़ शरीफ़ ने लिखा, “मैंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय में एकता बहुत ज़रूरी है और पाकिस्तान शांति को आगे बढ़ाने में मददगार भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है.”

पाकिस्तान के ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं. अमेरिका-इसराइल हमलों में वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत पर जिन देशों ने सबसे पहले शोक जताया उनमें पाकिस्तान भी शामिल था.
अमेरिका से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार रात दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेराड कुशनर शामिल थे.

गार्डनर के मुताबिक़ दूसरी ज़्यादा विश्वसनीय रिपोर्ट के मुताबिक़ इन बातचीतों में मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में शामिल थे.

पिछले सप्ताह, अरब और मुस्लिम बहुल देशों के विदेश मंत्री सऊदी अरब की राजधानी रियाद में जमा हुए, जहां उन्होंने इस युद्ध में ईरानी कार्रवाई की निंदा तो की, लेकिन साथ ही इसराइल के हमलों की आलोचना भी की. खास तौर पर साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर इसराइली हमले को लेकर इन देशों ने बहुत नाराज़गी जताई.

युद्ध का यह विस्तार ही इस क्षेत्र को सबसे ज़्यादा अस्थिर कर रहा है, जहां पहले सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे थे, वहीं अब आर्थिक ठिकाने निशाना बन रहे हैं.

इससे पहले सोमवार को ही ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत हुई थी.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि उनकी ट्रंप से इस बारे में बातचीत हुई है और अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से, ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और इसराइल का जो मक़सद था ‘वो हासिल हो जाएगा.’

लेकिन ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने इससे इनकार करते हुए इसे ‘फ़ेक न्यूज़’ बताया और कहा कि इसका इस्तेमाल तेल बाज़ार को ‘प्रभावित’ करने के लिए किया जा रहा है.
ट्रंप के बातचीत वाले बयान के बावजूद लेबनान, तेहरान और खाड़ी देशों में हमले लगातार जारी हैं.

लेबनान की राजधानी बेरूत में इसराइली हमलों के बाद कई जगहों से धुआं उठता देखा गया.

वहीं सऊदी अरब ने दावा किया कि उसके पूर्वी प्रांत में उसके सुरक्षा बलों ने चार ड्रोन्स को मार गिराया.

वहीं बीबीसी संवाददाता एंथनी जर्चर ने बताया कि ट्रंप के ईरान से बातचीत वाले बयान के बाद तेल की वैश्विक क़ीमतों में कमी देखी गई.

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने चेतावनी देते हुए कहा कि युद्ध के जल्द ख़त्म होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाज़ी है.

SANJAY PANDEY

SANJAY PANDEY

District Reporter

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