उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शुरू करने की घोषणा की गई है। यह प्रक्रिया 30 जून 2026 तक चलेगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही दाम मिल सके और उन्हें बिचौलियों के चक्कर न काटने पड़ें।
यहाँ इस योजना और लेख की मुख्य बातें दी गई हैं:
1. खरीद की समयसीमा और लक्ष्य
प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार, दलहन और तिलहन की यह खरीद मुख्य रूप से 7 अप्रैल (कुछ क्षेत्रों में 2 अप्रैल से भी प्रस्तावित) से शुरू होकर 30 जून तक चलेगी। सरकार ने इस बार रिकॉर्ड खरीद का लक्ष्य रखा है:
मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन (उत्पादन का लगभग 100%)
सरसों: 5.30 लाख मीट्रिक टन
चना: 2.24 लाख मीट्रिक टन
2. नई MSP दरें (2026-27)
सरकार ने इस वर्ष समर्थन मूल्य में वृद्धि की है ताकि किसानों की आय बढ़ सके। नई दरें इस प्रकार हैं:
फसल नया MSP (प्रति क्विंटल) पिछले वर्ष से वृद्धि
मसूर ₹7,000 ₹300
सरसों ₹6,200 ₹250
चना ₹5,875 ₹225
अरहर ₹8,000 –
3. पारदर्शिता और भुगतान की प्रक्रिया
योगी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
आधार आधारित सत्यापन: खरीद केंद्रों पर e-Pop (Point of Purchase) मशीनों के जरिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।
सीधा भुगतान (DBT): फसल की खरीद के बाद भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों (Direct Benefit Transfer) में भेजा जाएगा।
खरीद केंद्र: नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ राज्य की एजेंसियां (PCF, UPSS आदि) भी सक्रिय रहेंगी। लगभग 190 से अधिक विशेष केंद्र खोलने का प्रस्ताव है।
4. किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
पंजीकरण: लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
दस्तावेज: पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खतौनी (भूमि रिकॉर्ड) की आवश्यकता होगी।
सीधी खरीद: किसान अपनी फसल सीधे केंद्रों पर ले जाकर एमएसपी का लाभ उठा सकते हैं, जिससे उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी।
निष्कर्ष:
योगी सरकार का यह कदम न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि दलहन और तिलहन के उत्पादन में उत्तर प्रदेश को और अधिक आत्मनिर्भर बनाएगा। 30 जून तक की लंबी अवधि सुनिश्चित करती है कि हर छोटे-बड़े किसान को अपनी उपज बेचने का पर्याप्त समय मिले।