भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। सरकार की नई नीतियों, बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण उपभोक्ता अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। 2025–26 के दौरान EV बाजार ने नई ऊंचाइयाँ छुई हैं और उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रफ्तार आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है। नई सरकारी योजनाएँ, ऑटो कंपनियों की आक्रामक रणनीतियाँ और बढ़ता चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस बदलाव को गति दे रहे हैं।
भारत में EV बाजार की तेज़ रफ्तार
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अब शुरुआती चरण से आगे बढ़कर एक मजबूत विकास चरण में प्रवेश कर चुका है। हाल के उद्योग आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश में कुल EV बिक्री लगभग 23 लाख (2.3 मिलियन) यूनिट तक पहुँच गई, जो सभी नए वाहन पंजीकरणों का लगभग 8% हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहन इस वृद्धि के प्रमुख चालक बने हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में EV की मांग तेजी से बढ़ी है। उत्तर प्रदेश अकेले ही लगभग 4 लाख EV बिक्री के साथ देश का सबसे बड़ा EV बाजार बन गया है।
चारपहिया इलेक्ट्रिक कारों के मामले में भी बाजार में तेजी दिखाई दे रही है। 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में लगभग 77% की वृद्धि दर्ज की गई, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और नई तकनीकों की स्वीकृति को दर्शाती है।
सरकार की नीतियाँ और 2026 तक के लक्ष्य
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। FAME (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) योजना, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) और बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने वाली योजनाएँ इस बदलाव की आधारशिला बन चुकी हैं।
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य 2030 तक नए वाहनों की बिक्री में EV की हिस्सेदारी को लगभग 30% तक पहुँचाना है। इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी तकनीक और स्थानीय उत्पादन को मजबूत किया जा रहा है।
इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में लगभग 10,900 इलेक्ट्रिक बसों की बड़ी सरकारी निविदा जारी की गई, जिसका उद्देश्य शहरों में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।
प्रमुख ऑटो कंपनियों की रणनीतियाँ
भारतीय और वैश्विक ऑटो कंपनियाँ अब इलेक्ट्रिक सेगमेंट को भविष्य का मुख्य बाजार मान रही हैं। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एमजी मोटर, हुंडई और बीवाईडी जैसी कंपनियाँ तेजी से नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं।
टाटा मोटर्स ने 2025 में अकेले लगभग 70,000 से अधिक इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दर्ज की और यह EV बाजार में अग्रणी कंपनी बनी हुई है।
कई कंपनियाँ अब “बैटरी-एज़-ए-सर्विस” (BaaS) जैसे नए बिजनेस मॉडल भी पेश कर रही हैं, जिसमें वाहन की कीमत कम करने के लिए बैटरी को अलग से सब्सक्रिप्शन के रूप में दिया जाता है। यह मॉडल EV खरीदने की शुरुआती लागत कम करने में मदद करता है और अधिक ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी बदलाव
EV अपनाने में चार्जिंग सुविधाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, देश में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या कुछ वर्षों में 5,000 से बढ़कर 26,000 से अधिक हो चुकी है।
इसके साथ ही बैटरी तकनीक में सुधार, लंबी ड्राइविंग रेंज और कम ऑपरेटिंग लागत ने भी उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाया है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भी लोगों को इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर प्रेरित कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय: भविष्य की दिशा
ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का EV बाजार अभी अपनी शुरुआती तेज़ वृद्धि के चरण में है। नीति समर्थन, तकनीकी विकास और निजी निवेश के कारण आने वाले वर्षों में EV की हिस्सेदारी लगातार बढ़ सकती है।
हालाँकि चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार, बैटरी की लागत और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता जैसे मुद्दों को हल करना आवश्यक होगा। कुछ वैश्विक आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम है, इसलिए आगे सुधार की काफी गुंजाइश है।
आगे क्या होगा?
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें और कम होंगी तथा अधिक किफायती मॉडल बाजार में आएंगे। साथ ही सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से चार्जिंग नेटवर्क और मजबूत होगा।
निष्कर्ष
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति अब तेज़ी से आकार ले रही है। सरकारी समर्थन, तकनीकी नवाचार और उपभोक्ताओं की बदलती सोच EV बाजार को नई दिशा दे रही है। यदि वर्तमान रफ्तार बनी रहती है, तो आने वाले दशक में भारत दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में शामिल हो सकता है।