February 15, 2026

कमजोरी नहीं, एनीमिया का खतरा: मेडिकल कॉलेज ने शुरू की जागरूकता मुहिम

(ब्यूरो कौशाम्बी / आनन्द कुमार द्विवेदी)
बच्चों में सुस्ती, थकान और पढ़ाई में ध्यान न लगना अक्सर सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है, लेकिन कई बार यही लक्षण एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं। इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए कौशाम्बी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ने विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस के अवसर पर डी-वॉर्मिंग (कृमिनाशक) एवं जागरूकता अभियान का आयोजन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मेडिकल कॉलेज परिसर से हुई, जहां प्रधानाचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम मंझनपुर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय कादीपुर पहुंची, जहां छात्र-छात्राओं को एनीमिया के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत प्रधानाचार्य डॉ. सिंह ने कहा कि एनीमिया केवल शारीरिक कमजोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक विकास, एकाग्रता और शैक्षणिक प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से एनीमिया होता है। हीमोग्लोबिन शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। इसकी कमी होने पर बच्चों में थकान, चक्कर आना, सुस्ती और पढ़ाई में रुचि कम होने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

पैथोलॉजी विभाग के डॉ. रविरंजन सिंह ने सरल भाषा में बताया कि आयरन की कमी एनीमिया का प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, चना, गुड़ और मूंगफली जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन से एनीमिया की रोकथाम संभव है। साथ ही समय-समय पर कृमिनाशक दवा लेना भी आवश्यक है, क्योंकि पेट के कीड़े शरीर में पोषक तत्वों की कमी पैदा करते हैं।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि एनीमिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, संतुलित आहार, स्वच्छता और नियमित डी-वॉर्मिंग बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं की हीमोग्लोबिन जांच की गई और उन्हें आयरन-फोलिक एसिड तथा कृमिनाशक दवाएं वितरित की गईं। अंत में सभी छात्रों और शिक्षकों ने एनीमिया मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के संकाय सदस्य, स्वास्थ्य कर्मी और इंटर्न भी उपस्थित रहे।

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