क्या अमेरिका और खाड़ी देशों की वायु रक्षा प्रणाली ईरान के ड्रोन और मिसाइलों का सामना कर पाएगी?
ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के हमलों के बावजूद, यह स्पष्ट हो चुका है कि ईरान आसानी से समर्पण करने वाला नहीं है। सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनी और कई वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौत के बावजूद, ईरान ने मध्य पूर्व में विभिन्न लक्ष्यों पर ड्रोन और मिसाइलें दागने का सिलसिला जारी रखा है। यह स्थिति अमेरिका और उसके सहयोगियों, जिनमें इजरायल और खाड़ी के देश शामिल हैं, के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। समस्या यह है कि क्या उनके पास ईरान के हवाई हमलों का सामना करने के लिए पर्याप्त वायु रक्षा प्रणाली मौजूद है।
अमेरिका और उसके सहयोगी कई प्रकार के हथियारों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वे आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट कर सकें। इनमें सबसे महत्वपूर्ण थाड (Thaad) इंटरसेप्टर्स, पैट्रियट सिस्टम और एसएम-परिवार के नौसैनिक मिसाइल शामिल हैं। वहीं, इजरायल लंबी दूरी के एरो इंटरसेप्टर्स का भी उपयोग करता है। हालांकि, इन इंटरसेप्टर्स की आपूर्ति पिछले कुछ वर्षों में गंभीर दबाव में रही है।
इनमें से कई इंटरसेप्टर्स यूक्रेन को दिए गए हैं, जो निरंतर रूसी हवाई हमले का सामना कर रहा है। इसके अलावा, कुछ को लाल सागर में ईरान समर्थित हौथियों के हमलों से जहाजों की रक्षा के लिए इस्तेमाल किया गया है। और अधिक इंटरसेप्टर्स को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात किया गया है, ताकि दक्षिण कोरिया और ताइवान को संभावित उत्तर कोरियाई और चीनी हमलों से सुरक्षा मिल सके।
आज के आधुनिक युद्ध में इन हथियारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन अमेरिका के पास इन मुनिशन्स का भंडार खतरनाक स्तर पर कम हो रहा है। प्राथमिकताओं में बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा है, और उत्पादन हाल ही में ही गति पकड़ पाया है।
इस प्रकार, अमेरिका और उसके सहयोगियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ईरान के निरंतर हवाई हमलों का सामना करने के लिए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करें। इस खेल में समय और संसाधनों की कमी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस चुनौती का सामना कर पाएंगे या नहीं।