नक्सल नेतृत्व का गढ़ रहा बालेबेड़ा अब सुरक्षा बलों की निगरानी में
कभी माओवादी कम्पनी–01 और कम्पनी–10 के बड़े नक्सली नेताओं का गढ़ रहे बालेबेड़ा के जंगल अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सुरक्षित हो रहे हैं। क्षेत्र में शांति की स्थापना से स्थानीय ग्रामीणों में विश्वास बढ़ा है और वे पुलिस-प्रशासन को अपने दरवाजे पर पाकर राहत महसूस कर रहे हैं।
विकास कार्यों को मिलेगा गति
कैंप की स्थापना के बाद बालेबेड़ा समेत आसपास के गांव रेपिंग, वाड़ापेंदा, ओरछापाल, कोंदागुण्डा, कांदुलनार में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, चिकित्सा और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाने का रास्ता खुलेगा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से सोनपुर–गारपा–परियादी–काकुर–बा
माड़ बचाओ अभियान में लगातार विस्तार
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नारायणपुर पुलिस ‘‘माड़ बचाओ’’ अभियान के तहत अबूझमाड़ के भीतरी इलाकों में लगातार नए कैंप स्थापित कर रही है। वर्ष 2025 में पुलिस ने कुतुल, कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर और बालेबेड़ा सहित कई माओवादी आश्रय स्थलों में कैंप खोलकर नक्सली गतिविधियों को कमजोर किया है।
उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में स्थापित हुआ कैंप
नए कैंप की स्थापना में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दराज, कांकेर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक अमित कांबले, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रोबिनसन गुरिया, बीएसएएफ कमांडेंट कुलदीप शर्मा (133वीं), अनिल रावत (86वीं), सीएएफ 16वीं बटालियन के सेनानी संदीप पटेल समेत अन्य अधिकारियों का मार्गदर्शन रहा। इसके साथ ही डीआरजी, बस्तर फाइटर तथा BSF 86वीं, 133वीं और 135वीं बटालियन के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बालेबेड़ा जिला मुख्यालय से 67 किमी, थाना सोनपुर से 41 किमी और गारपा से 17 किमी दूर स्थित है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बलों द्वारा इस कैंप की स्थापना नक्सल प्रभावित माड़ क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

