बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को चhatrapati शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास मुस्लिम टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमजान के पवित्र महीने के दौरान नमाज अदा करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ‘सुरक्षा सर्वोपरि’ है।
जस्टिस बीपी कोलाबावाला और फिर्दोश पूनिवाला की पीठ एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें टर्मिनल 1 के पास एक अस्थायी शेड को फिर से स्थापित करने या निकटवर्ती स्थान पर एक वैकल्पिक जगह आवंटित करने की मांग की गई थी। यह शेड अप्रैल में ध्वस्त कर दिया गया था। याचिका को टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर पुरुष संघ ने दायर किया था।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मांग का विरोध करते हुए सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया। अदालत ने यह भी बताया कि एयरपोर्ट प्राधिकरण ने सात वैकल्पिक स्थलों का सर्वेक्षण किया, लेकिन सभी को धमकी के दृष्टिकोण से असुरक्षित पाया गया। यह भी ध्यान दिया गया कि वाईवीआईपी (Very Important Person) एयरपोर्ट के पास के गेट से आना-जाना कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के वकील सतीश टालेकर ने अदालत को बताया कि पिछले 30 वर्षों में शेड के पास कोई सुरक्षा समस्या नहीं रही है और प्राधिकरण जानबूझकर मुस्लिम टैक्सी चालकों और यात्रियों को नमाज अदा करने से रोक रहा है। हालांकि, अदालत ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस कोलाबावाला ने याचिकाकर्ता से कहा, “कोई भी आपको दिन में पांच बार नमाज पढ़ने से नहीं रोक रहा है। आप किसी मस्जिद में जाकर नमाज अदा कर सकते हैं।”
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब रमजान का महीना चल रहा है, जब मुस्लिम समुदाय के लोग विशेष रूप से नमाज अदा करने के लिए स्थानों की तलाश में रहते हैं। हालांकि, सुरक्षा के दृष्टिकोण से किसी भी प्रकार की चूक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इस फैसले ने विशेष रूप से टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के बीच चिंता और असंतोष पैदा किया है, जो लंबे समय से इस स्थान पर नमाज अदा करने की परंपरा का पालन कर रहे थे।