March 10, 2026

“भारत का छिपा हुआ स्पोर्ट्स स्कैम?”

छोटे शहरों के खिलाड़ियों के साथ हो रहा बड़ा खेल – एक विशेष जांच रिपोर्ट
विशेष संवाददाता रिपोर्ट
भारत में खेलों का भविष्य उज्ज्वल बताया जाता है। सरकार हर साल खिलाड़ियों के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करती है। Sports Authority of India जैसे संस्थान देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन क्या सच में यह पैसा सही खिलाड़ियों तक पहुंच रहा है?
देश के कई छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले खिलाड़ियों की कहानियां एक अलग ही तस्वीर दिखाती हैं। इस विशेष जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि टैलेंट की कमी नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियां कई खिलाड़ियों के सपनों को तोड़ रही हैं।
टैलेंट है, लेकिन मौका नहीं
भारत के छोटे शहरों में हजारों प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है – सिस्टम तक पहुंच।
छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने जिला और राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया। फिर भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर के कैंप या ट्रेनिंग का मौका नहीं मिला।
एक पूर्व जूनियर एथलीट ने बताया कि कई बार चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं होती। खिलाड़ियों का कहना है कि कई बार चयन में सिफारिश और राजनीतिक प्रभाव भी भूमिका निभाते हैं।
सुविधाओं की भारी कमी
देश के कई जिलों में खेल स्टेडियम तो बने हुए हैं, लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
कई जगहों पर ट्रैक टूटा हुआ है, जिम उपकरण खराब हैं और कोचिंग की व्यवस्था भी सीमित है। इससे खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग नहीं मिल पाती।
खेल विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश में अगर सही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए तो हजारों अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
बजट और जमीन पर हकीकत
भारत सरकार हर साल खेल बजट में वृद्धि की घोषणा करती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पैसा वास्तव में खिलाड़ियों तक पहुंच रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार कई राज्यों में खेल परियोजनाओं के लिए पैसा मंजूर तो होता है, लेकिन उसका उपयोग पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। कुछ मामलों में परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं।
इस वजह से खिलाड़ियों को निजी अकादमियों का सहारा लेना पड़ता है, जहां ट्रेनिंग का खर्च काफी ज्यादा होता है।
निजी अकादमियों का बढ़ता प्रभाव
भारत में खेलों के विकास में निजी अकादमियों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, बैडमिंटन में Pullela Gopichand की अकादमी ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को तैयार किया है।
इसी तरह भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी P. V. Sindhu भी इसी अकादमी से ट्रेनिंग लेकर विश्व स्तर पर सफल हुईं।
लेकिन हर खिलाड़ी के पास ऐसी अकादमी में जाने की आर्थिक क्षमता नहीं होती।
चयन प्रक्रिया पर सवाल
कई खिलाड़ियों और कोचों का कहना है कि कुछ खेलों में चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं है।
कुछ खिलाड़ियों का आरोप है कि ट्रायल के दौरान बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। जबकि कुछ अन्य खिलाड़ियों को सीधे मौका मिल गया।
हालांकि संबंधित अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते हैं और कहते हैं कि चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होता है।
छोटे शहरों की अनदेखी
भारत के कई महान खिलाड़ी छोटे शहरों से आए हैं। क्रिकेट के दिग्गज Mahendra Singh Dhoni भी झारखंड के रांची से उभरे थे।
अगर ऐसे खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में सही समर्थन न मिलता तो शायद वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों में टैलेंट हंट प्रोग्राम को और मजबूत करने की जरूरत है।
मानसिक दबाव और आर्थिक संघर्ष
खेलों में सफलता पाने के लिए खिलाड़ियों को वर्षों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन कई युवा खिलाड़ी आर्थिक दबाव के कारण अपने सपने छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
कई खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, उपकरण और यात्रा खर्च खुद ही उठाना पड़ता है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह बहुत कठिन हो जाता है।
कुछ मामलों में खिलाड़ियों ने बताया कि उन्हें स्पॉन्सर ढूंढने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा।
क्या समाधान है?
खेल विशेषज्ञों के अनुसार भारत में खेल प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाने की जरूरत है।
1. चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता
हर चयन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और रिकॉर्डेड बनाया जाना चाहिए।
2. छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर
जिला स्तर पर आधुनिक स्पोर्ट्स सेंटर बनाए जाने चाहिए।
3. खिलाड़ियों के लिए आर्थिक सहायता
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सीधे वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए।
4. स्कूल स्तर पर खेलों को बढ़ावा
स्कूलों में खेलों को शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
सरकार और संस्थाओं की भूमिका
भारत सरकार ने हाल के वर्षों में Khelo India जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना है।
इस योजना के तहत कई खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति और ट्रेनिंग सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को फायदा मिल सके।
भविष्य की उम्मीद
भारत में खेलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन से युवाओं में उत्साह बढ़ा है।
अगर सिस्टम की कमजोरियों को दूर किया जाए और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही समर्थन मिले, तो भारत आने वाले वर्षों में खेल महाशक्ति बन सकता है।
निष्कर्ष
यह जांच रिपोर्ट यह सवाल उठाती है कि क्या भारत की खेल प्रणाली वास्तव में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को समान अवसर दे रही है?
छोटे शहरों के खिलाड़ियों की कहानियां बताती हैं कि अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। लेकिन अगर सरकार, खेल संस्थान और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें, तो भारत का खेल भविष्य बेहद उज्ज्वल हो सकता है।

Goovardhan Rao

District Reporter

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