अमेरिकी सेना ने मंगलवार को श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत, IRIS Dena, को टॉरपीडो से डुबोने की जानकारी दी। यह घटना अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुश्मन के पोत को टॉरपीडो से डुबोने का पहला मामला है।
ईरानी युद्धपोत के डूबने के बाद श्रीलंकाई सरकार ने बुधवार को 32 गंभीर रूप से घायल नाविकों को बचा लिया। श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हरत ने बताया कि इस घटना के बाद से कम से कम 101 क्रू सदस्यों के लापता होने की आशंका है। उल्लेखनीय है कि IRIS Dena ने भारत के विशाखापत्तनम में 15 से 25 फरवरी तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़े की समीक्षा में भाग लिया था।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या भारत का अपने पड़ोस में कोई प्रभाव बचा है या यह स्थान भी चुपचाप वॉशिंगटन और तेल अवीव को सौंप दिया गया है। उनकी यह टिप्पणी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई को इजरायल के साथ मिलकर किया।
अमेरिकी सेना ने यह कार्यवाई एक संयुक्त अभियान के तहत की, जो ईरान के खिलाफ इजरायल के समर्थन में शुरू किया गया था। इजरायल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार प्राप्त करने के करीब है, जबकि तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए बताया है। इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
भारत में इस संघर्ष के चलते व्यापार और निवेश पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का क्रम जारी है, जिसमें सेंसेक्स 1.4% नीचे चला गया है और निफ्टी भी नकारात्मक रुख दर्शा रहा है। ये घटनाक्रम एक बार फिर भारत के आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का कारण बन रहे हैं।