March 9, 2026

मैं टूट गया था, सपने बिखर गए थे…’ टी 20 वर्ल्ड कप में प्लेइंग इलेवन के लिए तरसते संजू सैमसन कैसे बने मैच विनर

“न्यूज़ीलैंड सिरीज़ के बाद मैं टूट गया था. मुझे लगा मेरा सपना फिर से बिखर गया है.”

जब संजू सैमसन को आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप 2026 का प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट चुना गया तो उनके ज़ेहन में वो यादें ताज़ा हुईं जब वो बुरी तरह बिखर गए थे.

उन्होंने शायद मन ही मन ये स्वीकार कर लिया था कि टीम इंडिया के साथ उनका सफर बस यहीं तक था.

तारीख़ 31 जनवरी, 2026. भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच पांच मैचों की सिरीज़ का आख़िरी मुक़ाबला. टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से पहले भारतीय टीम का भी आख़िरी मैच.

संजू सैमसन के बल्ले से निकले महज 6 रन. टी20 इंटरनेशनल में लगातार 11वीं पारी में संजू सैमसन अर्धशतक लगाने से चूक चुके थे.लेकिन उसी मुकाबले में ईशान किशन ने जड़ी सेंचुरी. भारतीय टीम जब 271 रन का बड़ा लक्ष्य खड़ा करने के बाद मैदान पर उतरी तो एक ऐसा वाक्या हुआ जिससे लगा कि संजू सैमसन के भारत के लिए वर्ल्ड कप में खेलने का ख्वाब अधूरा ही रह जाएगा.

संजू सैमसन अपनी विकेटकीपिंग किट लेकर बाउंड्री पार करने वाले ही थे कि टीम मैनेजमेंट से एक इशारा मिला. इशारा ये कि आज आप विकेटकीपिंग नहीं करेंगे, कीपिंग का जिम्मा संभालेंगे शतक लगाने वाले ईशान किशन.

उस वक्त संजू सैमसन की निराशा का आलम ये था कि उन्होंने अपने कीपिंग ग्लव्स बाउंड्री लाइन के पास खड़े दो नन्हें फैन को गिफ्ट कर दिए.संजू सैमसन के तोहफे ने उस दिन दो बच्चों का दिन बना दिया था. लेकिन वो उस वक्त बेहद ही खराब वक्त से गुजर रहे थे.

शायद उस वक्त उनके ज़ेहन में यही चल रहा था कि अब ज़िंदगी में इन ग्लव्स की ज़रूरत ही नहीं बची है.क्योंकि उस मुकाबले में ईशान किशन के कीपिंग का जिम्मा संभालने के साथ ही ये साफ हो गया था कि वर्ल्ड कप में टीम के फर्स्ट च्वाइस विकेटकीपर वही होंगे और संजू सैमसन को प्लेइंग 11 में जगह नहीं मिलेगी.

लेकिन महीने भर में ही संजू सैमसन के लिए वक्त बदल गया है. अब ना सिर्फ़ उनके अधूरे ख्वाब पूरे हो गए हैं बल्कि वो अपने करियर के शीर्ष पर पहुंच गए हैं.

आईसीसी वर्ल्ड कप के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि जिस खिलाड़ी को आधे सफर तक प्लेइंग 11 का हिस्सा बनाने के काबिल ना समझा जाए वो प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनकर निकले.

लेकिन अब ये बात क्रिकेट के इतिहास की नई हकीकत है. जिस संजू सैमसन के लिए कप्तान सूर्यकुमार यादव दो हफ्ते पहले तक प्लेइंग 11 में कोई जगह नहीं देख पा रहे थे, वही आज भारत की जीत के सबसे बड़े नायक हैं.

तीन नॉकआउट मुकाबले और तीनों में ही एक से बढ़कर एक पारी. संजू सैमसन ने ऐसा कमाल कर दिखाया है कि इसे क्रिकेट इतिहास के सबसे कामयाब कमबैक में काउंट किया जा सकता है.

संजू सैमसन ने पहले वर्चुअल क्वार्टर फाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 रन की नाबाद पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया. फिर उन्होंने वानखेड़े में 42 गेंद में 89 रन की पारी खेलकर ये तय किया कि भारतीय टीम फाइनल का हिस्सा बनने जा रही है.

अहमदाबाद में फिर 89 रन की पारी खेलकर तय किया कि टी-20 वर्ल्ड कप का ताज भारत के पास ही बरकरार रहेगा.

महज पांच मैचों में संजू सैमसन को 321 रन बनाने के लिए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया तो मानो उनके दिल के सारे दर्द बाहर निकल आए. निकलते भी क्यों ना उन्होंने 199.37 के स्ट्राइक रेट और 80.25 के औसत से ये रन बनाए थे.

वो महज तीसरे ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल और फाइनल में अर्धशतक लगाया हो.

और जब कोई खिलाड़ी ऐसा प्रदर्शन कर दिखाए तो फिर उसके पास कहने के लिए शब्द भी कहां बचते हैं.इसलिए मैच के बाद संजू सैमसन ने कहा, “मानो सपना सच हो गया है, शब्द खत्म हो चुके हैं. मैं इन इमोशंस को प्रोसेस करने की कोशिश कर रहा हूं.”

“इनकी शुरुआत 2024 से हुई. मैं टीम के साथ था और एक भी मैच नहीं देखा पाया. मैं लगातार विजुअलाइज करता रहा. मैं सपना देखता रहा. मैं यही करना चाहता था.”

“मुझे पता था कि दोबारा बेहतर होने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ के बाद मैं टूट गया था. मैं महसूस कर रहा था कि मेरा सपना बिखर गया है.”

“लेकिन शायद ईश्वर के पास कोई और प्लान था. ख्वाब देखने की हिम्मत रखने की खुशी है. बीते दो महीने से मैं सचिन तेंदुलकर सर के साथ संपर्क में बना हुआ था. मैं शुक्रगुजार हूं. कल रात भी उन्होंने कॉल किया था.”

ख्वाब के पूरा होने से मिलने वाली खुशी तब झलकी जब कुलदीप यादव उनके पास वर्ल्ड कप की ट्रॉफी लेकर आए. पहले उन्होंने कुलदीप के साथ मिलकर ट्रॉफी को उठाया.

और फिर ट्रॉफी को जब कुलदीप वापस लेकर आगे बढ़ने लगे और उन्होंने बिना बोले कहा, अभी ठहरो और कुलदीप के हाथों से उस ट्रॉफी को लेकर काफी देर तक निहारते ही रहे.

इस दौरान उनकी नज़रें जब जब आसमान की ओर गई होंगे तब-तब उन्हें सैकड़ों सितारे दिखे होंगे. लेकिन इमोशंस के समुद्र के बीच गोते लगाते हुए शायद वो ये जान नहीं पा रहे होंगे कि क्रिकेट के लिए जीने-मरने वाले 140 करोड़ लोगों के मुल्क में अब वो खुद ऐसा सितारा बन गए हैं, जिन्हें शायद कभी नहीं भुलाया जाएगा.

और अब जब संजू सैमसन भविष्य में कोई इंटरव्यू देंगे तो उनके दिल के भीतर ये मलाल नहीं होगा कि “मैंने इंटरनेशनल क्रिकेट में 10 साल तो पूरे किए, पर मेरे हिस्से में 40 मैच ही आए. ”

क्योंकि अब इन चंद मैचों में जो उनका हासिल रहा, वो क्रिकेट के बड़े-बड़े दिग्गजों सैकड़ों मैच, हजारों रन और एक से बड़े एक कीर्तिमान बनाने के बाद भी नसीब नहीं हुआ.

SANJAY PANDEY

SANJAY PANDEY

District Reporter

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