✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा I इन्दौर। भोपाल
रफ़्तार, नशा और बेपरवाह आज़ादी—यह वो घातक मिश्रण है जिसने एक बार फिर मध्य प्रदेश के तीन घरों के चिरागों को सदा के लिए बुझा दिया। रालामंडल क्षेत्र में हुआ भीषण सड़क हादसा केवल एक ‘एक्सीडेंट’ नहीं, बल्कि उन युवाओं और माता-पिता के लिए एक कड़ा सबक है जो रफ़्तार और नशे की दुनिया को ‘मस्ती’ समझ लेते हैं।
हादसे की भयावहता: जन्मदिन का जश्न मातम में बदला
हादसा उस वक्त हुआ जब प्रखर कासलीवाल (कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के पुत्र) का जन्मदिन मनाकर चार दोस्त फॉर्म हाउस से वापस लौट रहे थे। कार की रफ़्तार इतनी तेज़ थी कि ट्रक से टकराते ही गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक हादसे में प्रेरणा बच्चन (पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की सुपुत्री), प्रखर कासलीवाल और एक अन्य साथी की मौके पर ही मौत हो गई। गाड़ी से मिली शराब की बोतलें इस बात की गवाह हैं कि नशा और रफ़्तार ने मिलकर मौत का जाल बुना था।
समाज के लिए एक तीखा संदेश: आज़ादी या आत्मघात?
यह घटना इंदौर के उन युवाओं के लिए एक चेतावनी है जो बड़े शहरों में पढ़ाई और करियर बनाने के बजाय पार्टियों और बेलगाम जीवनशैली में डूब जाते हैं।
- युवाओं के लिए: आज़ादी का मतलब गैर-जिम्मेदारी नहीं है। रफ़्तार का रोमांच सिर्फ एक पल का होता है, लेकिन उसका खामियाजा पूरे परिवार को जीवनभर भुगतना पड़ता है।
- अभिभावकों के लिए: आप अपने बच्चों को बड़े शहरों में सपने बुनने के लिए भेजते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि वे उन सपनों को सींच रहे हैं या नशे में स्वाहा कर रहे हैं? पिता चाहे गरीब हो या कोई रसूखदार मंत्री, औलाद खोने का गम सबके लिए बराबर होता है।
बड़वानी में शोक की लहर: पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की सुपुत्री प्रेरणा का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुँचा, तो पूरा बड़वानी उमड़ पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीरें और वीडियो आज हर उस इंसान की आँखें नम कर रहे हैं जो यह सोचकर सिहर उठता है कि एक गलत फैसले ने कितनी जिंदगियां तबाह कर दीं।
सीख: डिग्री, स्किल और नैतिकता ही भविष्य बनाती है। लेकिन अगर नैतिकता और जिम्मेदारी का साथ छूट जाए, तो रफ़्तार की ये आज़ादी केवल श्मशान तक ले जाती है। अपने बच्चों को ‘सुविधाएं’ देने के साथ-साथ ‘संस्कार’ और ‘संयम’ देना भी आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

