मुंबई : कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अतुल लोंढे ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में बिजली की दरें 16 प्रतिशत महंगी हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
पार्टी प्रदेश मुख्यालय तिलक बवन में बुधवार को पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए लोंढे ने बताया कि राज्य विद्युत नियामक आयोग के नए रिवाइज्ड ऑर्डर ने मौजूदा बिजली टैरिफ में 20 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लघु और मध्यम उपभोक्ता सीधे प्रभावित हो रहे हैं और पूरा सिस्टम चरमरा सकता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महावितरण को पुराने ऑर्डर को लागू करने और फिर से जन सुनवाई करके गड़बड़ी ठीक करने को कहा है। आयोग को 25 जून 2025 के रिवाइज्ड एमवाईटी ऑर्डर को तुरंत रद्द कर 28 मार्च 2025 के ऑर्डर को फिर से लागू करना चाहिए। ताकि इंडस्ट्रीज़, एसएमईएस और सोलर प्रोजेक्ट को बचाया जा सके। महावितरण को सोलर प्रोजेक्ट से होने वाली आय को सार्वजनिक करना चाहिए। राज्य सरकार को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर राज्य के इंडस्ट्रियल भविष्य को बचाना चाहिए। लोंढे ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऐलान किया था कि राज्य में सस्ती बिजली मिलेगी। 5 साल में बिजली की दरें 50 प्रतिशत और पहले साल में 10 प्रतिशत कम की जाएंगी, जबकि असलियत इसके उलट है। बिजली के दाम कम नहीं होंगे, बल्कि 16 प्रतिशत महंगे हो जाएंगे। पड़ोसी राज्य गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना में बिजली टैरिफ महाराष्ट्र से कम हैं। गुजरात में घरेलू बिजली टैरिफ 3.0 से 5.2 रुपये प्रति यूनिट है, कर्नाटक में 3.7 से 7.3 रुपये और तेलंगाना में 2 से 10 रुपये प्रति यूनिट है। महाराष्ट्र में यही टैरिफ 4.4 से 12.8 रुपये प्रति यूनिट है। जब सभी राज्यों में बिजली बनाने की लागत एक जैसी है, तो महाराष्ट्र में बिजली महंगी क्यों है?
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