असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक बयान में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ‘मिया’ मुसलमानों, जो असम में बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों के रूप में जाने जाते हैं, को दुश्मन नहीं मानती। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ आपत्तियां इस समुदाय के भीतर कुछ कथित प्रथाओं को लेकर हैं।
सरमा ने कहा, “मिया लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं।” उन्होंने आगे बताया कि पार्टी की चिंताओं का केंद्र ‘लव जिहाद’, भूमि अतिक्रमण, बाल विवाह और ‘फर्टिलाइजर जिहाद’ जैसे मुद्दे हैं। यह बात उल्लेखनीय है कि ‘फर्टिलाइजर जिहाद’ का आरोप लगाया गया है कि इस समुदाय के किसान अपने खाद्य उत्पादों में रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरमा ने कहा कि यदि इन मामलों को हल किया जाए, तो बीजेपी इस समुदाय को शत्रुतापूर्ण नहीं मानती।
उनका यह बयान तब आया जब उनसे पूछा गया कि क्या एक ‘मिया’ मुसलमान आगामी असम विधानसभा चुनावों में बीजेपी का टिकट प्राप्त कर सकता है। सरमा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी ऐसे लोगों के साथ सहज है जो “देशभक्त” हैं और जो “भारत माता की जय” या “वन्दे मातरम्” जैसे नारों का समर्थन करते हैं। यह स्पष्ट है कि बीजेपी की चुनावी रणनीति इस समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाने की दिशा में है।
सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कुछ ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी और उम्मीदवारों का चयन जीतने की संभावना के आधार पर किया जाएगा। यह निश्चित करता है कि बीजेपी अपने चुनावी अभियानों में बेहतर रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
असम में बीजेपी की स्थिति को देखते हुए, यह बयान पहले से ही राजनीतिक हलचलों को जन्म दे सकता है। हिमंता बिस्वा सरमा का यह प्रयास यह दिखाता है कि पार्टी मुस्लिम समुदाय को अपने चुनावी समीकरण में शामिल करने के लिए तैयार है, बशर्ते वे पार्टी की विचारधारा के प्रति सहानुभूति रखते हों। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी कितनी सफल होती है।