February 28, 2026

अमेरिका-ईरान वार्ता: टकराव के ख़तरे के बीच बड़ी बैठक, ट्रंप के पास क्या विकल्प?

अमेरिका और ईरान के अधिकारी जिनेवा में सीधी बातचीत के तीसरे दौर के लिए मिल रहे हैं. इन वार्ताओं को टकराव टालने के लिए अहम माना जा रहा है.

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि परमाणु समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान पर हमला कर सकते हैं.

ये बातचीत ऐसे समय हो रही है जब साल 2003 में अमेरिकी अगुवाई में हुए इराक़ युद्ध के बाद पश्चिमी एशिया में अमेरिकी ने पहली बार बड़ी सैन्य तैनाती की है. वहीं, ईरान ने भी कहा है कि वह किसी भी हमले का बलपूर्वक जवाब देगा.

एक बार फिर से इन वार्ताओं की मध्यस्थता ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी कर रहे हैं. अल्बुसैदी ने कहा कि वार्ताकारों ने ‘नए और रचनात्मक विचारों और समाधानों के लिए अभूतपूर्व तरीके से खुलापन’ दिखाया है.

हालांकि, किसी भी समझौते तक पहुंचने की संभावना पर अभी तक स्पष्ट स्थिति नहीं है.ट्रंप ने कहा है कि वह कूटनीति के ज़रिए संकट सुलझाना पसंद करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि वह ईरान पर सीमित हमला करने पर विचार कर रहे हैं ताकि उसके नेताओं पर समझौता स्वीकार करने का दबाव बनाया जा सके.

हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ़ नहीं बताया कि वार्ता में उनकी ठोस मांगें क्या हैं.

ईरान ने अपने क्षेत्र में यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाने की अमेरिकी मांग को ख़ारिज कर दिया है. लेकिन संकेत मिले हैं कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ रियायतें देने के लिए तैयार हो सकता है.

इस महीने की शुरुआत में हुई पिछली दो बैठकों की तरह, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची कर रहे हैं. वहीं, अमेरिकी पक्ष का प्रतिनिधित्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर कर रहे हैं.

हाल के हफ़्तों में अमेरिका ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में हज़ारों सैनिक भेजे हैं. क्षेत्र में पहुँचे अमेरिकी नेवी के बेड़े में दो विमानवाहक पोत, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और रिफ़्यूलिंग वाले विमान शामिल हैं.

ट्रंप ने पिछले महीने पहली बार ईरान पर बमबारी करने की धमकी दी थी.

उन दिनों ईरानी सुरक्षाबल सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को बेरहमी से दबा रहे थे. सुरक्षाबलों की कार्रवाई में हज़ारों लोगों की मौत हुई थी.

लेकिन तब से ही ट्रंप का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर टिक गया है, जो लंबे समय से पश्चिमी मुल्कों के साथ विवाद का मुख्य मुद्दा रहा है.

अमेरिका और इसराइल दशकों से ईरान पर गुप्त तरीके से परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि, ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

फिर भी, वह एकमात्र ऐसा ग़ैर-परमाणु हथियार संपन्न देश है जिसने हथियार बनाने के स्तर के करीब तक यूरेनियम संवर्धन किया है.मंगलवार को कांग्रेस में अपने ‘स्टेट ऑफ़ द यूनियन’ भाषण में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव का छोटा सा और अस्पष्ट ज़िक्र किया, लेकिन उन्होंने संभावित हमलों के बारे में कोई साफ़ तर्क नहीं पेश किया.

उन्होंने कहा कि ईरान ऐसी मिसाइलें बनाने में लगा हुआ है जो ‘जल्द ही’ अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम होंगी. हालांकि, उन्होंने इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पिछले साल हुए हमलों के बाद ईरान फिर से परमाणु हथियार कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि वह ‘दुनिया में आतंक के नंबर एक स्पॉन्सर’ को परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते.

पिछले साल जून में अमेरिका ने इसराइल के साथ मिलकर ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. उस समय ट्रंप ने कहा था कि ये ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं.

ईरान का कहना है कि हमलों के बाद उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम रुक गया था. हालांकि, उसने अभी तक इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के निरीक्षकों को क्षतिग्रस्त जगहों पर जाने की इजाज़त नहीं दी है.

ट्रंप ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन हमने वो सीक्रेट वर्ड्स नहीं सुने हैं (ईरान से) कि ‘हम कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे’.”

हालांकि, ट्रंप के भाषण से कुछ घंटे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ‘किसी भी परिस्थिति में कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा.’

अराग़ची ने यह भी कहा कि ‘दोनों पक्षों की चिंताओं का समाधान करने वाले और पारस्परिक हितों को साधने वाला समझौता करने का ऐतिहासिक मौका मौजूद है.’

ट्रंप के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका पर उसके परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या को लेकर बार-बार ‘बड़े झूठ’ बोलने का आरोप लगाया.ईरान ने अभी तक वार्ता के प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन जिनेवा में हो रही चर्चाओं में यूरेनियम संवर्धन के लिए एक रीजनल कंसोर्टियम बनाने का प्रस्ताव शामिल हो सकता है, जिस पर पहले की वार्ताओं में भी चर्चा हुई थी.

इसके अलावा इस पर भी विचार हो सकता है कि ईरान के पास मौजूद लगभग 400 किलोग्राम हाइली एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा.

इसके बदले में ईरान उन प्रतिबंधों को हटाने की उम्मीद कर रहा है, जिन्होंने उसकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालांकि, ईरानी शासन के विरोधियों का कहना है कि किसी भी तरह की राहत से धर्मगुरुओं के इस राज को नई जीवनरेखा मिलेगी.

फिर भी यह साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते के लिए किन शर्तों को स्वीकार सकते हैं. ईरान पहले ही देश के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की सीमित करने और ग़ज़ा के हमास, लेबनान के हिज़बुल्लाह, इराक़ के मिलिशिया, यमन के हूती जैसे क्षेत्र में अपनी प्रॉक्सीज़ को सहयोग बंद करने पर चर्चा से इनकार कर चुका है.

ईरान इन्हें ‘एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस’ कहता है.

अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित कुछ अनाम अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप आने वाले दिनों में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) या परमाणु ठिकानों पर शुरुआती हमला करने पर विचार कर रहे थे. रिपोर्टों के मुताबिक, अगर जिनेवा में चल रही वार्ता विफल होती है तो राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को हटाने के उद्देश्य से एक बड़े अभियान का भी आदेश दे सकते हैं.

ऐसी भी ख़बरें हैं कि अमेरिका के जॉइंट चीफ ऑफ़ स्टाफ़ के अध्यक्ष ने भी चेतावनी दी है कि ईरान पर हमले जोखिम भरे हो सकते हैं, जो संभवतः अमेरिका को एक लंबे संघर्ष में उलझा सकते हैं. हालांकि, ट्रंप का कहना है कि जनरल डैन केन का मानना है कि इसे ‘आसानी से जीता’ जा सकता है.

इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले के जवाब में वह मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इसराइल पर हमला करेगा.क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को चिंता है कि ईरान पर हमला व्यापक संघर्ष की ओर ले जा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी है कि केवल हवाई ताक़त के दम पर देश के नेतृत्व को बदला नहीं जा सकता है.

हालांकि, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ऐसे किसी भी समझौते के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है जिसमें ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और उसकी प्रॉक्सीज़ शामिल न हों. नेतन्याहू लंबे समय से ईरान को इसराइल के लिए एक प्रमुख ख़तरा और क्षेत्र में अस्थिरता की वजह बताते रहे हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि इस महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस का दौरा करने वाले प्रधानमंत्री नेतन्याहू, संभवतः ईरानी शासन को हटाने के उद्देश्य से एक अभियान के पक्ष में दबाव बना रहे हैं.

अमेरिका के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है. इसराइल के बारे में भी माना जाता है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. हालांकि, वह न तो इसकी पुष्टि करता है और न ही खंडन.

स्टेट ऑफ़ द यूनियन भाषण से पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तथाकथित ‘गैंग ऑफ़ एट’ को एक गोपनीय ब्रीफ़िंग दी. यह समूह सीनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव के दोनों दलों के नेताओं और दोनों सदनों की ख़ुफ़िया समितियों के अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्यों से मिलकर बना है.

ब्रीफ़िंग के बाद, सीनेट में माइनॉरिटी लीडर चक शुमर ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, “यह एक गंभीर मामला है और प्रशासन को अमेरिकी जनता के सामने अपना पक्ष साफ़ करना होगा.”

SANJAY PANDEY

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