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Author: DR. MAHESH PRASAD MISHRA
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से भारत की संवैधानिक व्यवस्था पर आज एक बड़ा और असहज प्रश्न खड़ा हो गया है।क्या यही न्याय है कि रेल में बिना टिकट पकड़ा गया सामान्य नागरिक तुरंत दंडित हो,लेकिन हजारों–करोड़ों के घोटाले करने वाले नेता वर्षों तक जमानत पर ऐश करें,चुनाव लड़ें, जीतें और सत्ता के शिखर तक पहुँच जाएँ? देश ने यह दृश्य कई बार देखा है —जहाँ छोटी रिश्वत लेने पर कर्मचारी की नौकरी चली जाती है,किसी छात्र का भविष्य हमेशा के लिए बर्बाद हो जाता है,लेकिन भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी जेल से बाहर बैठकर नैतिकता पर भाषण देते…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से भोपाल / झालावाड़ (राजस्थान) मंदिर की मटकी से पानी पीने को लेकर युवक पर कुल्हाड़ी से हमला—यह खबर जितनी गंभीर है, उतनी ही गंभीर है इसका ग़लत प्रस्तुतिकरण। दुर्भाग्यपूर्ण यह नहीं कि हमला हुआ, बल्कि यह है कि प्रिंट मीडिया ने जिस तरह से इस घटना की हेडलाइन गढ़ी, उसने समाज को सच नहीं बल्कि भ्रम परोसने का काम किया। प्रथम दृष्टया समाचार की हेडलाइन पढ़ते ही यह धारणा बनती है कि किसी सवर्ण पुजारी ने दलित युवक पर मंदिर में पानी पीने के कारण हमला किया। यही वह बिंदु…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से विशेष राजनीतिक टिप्पणी अब यह कहना अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि कटु सत्य है कि भारत आज मेहनतकश राष्ट्र से धीरे-धीरे मुफ़्तखोरी का समाज बनता जा रहा है। यह स्थिति किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही फ्रीबी आधारित वोट-बैंक राजनीति की देन है, जिसमें हर सरकार ने सत्ता के लिए देश की आत्मा को दाँव पर लगा दिया। फ्रीबी: जनकल्याण नहीं, राजनीतिक रिश्वत-जिसे आज “जनकल्याण” कहा जा रहा है, उसका बड़ा हिस्सा वास्तव में राजनीतिक रिश्वत है—मुफ़्त बिजली, मुफ़्त पानी, नकद ट्रांसफर, मुफ्त सुविधाएँ—बिना यह पूछे कि…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से विशेष रिपोर्ट | वैचारिक विश्लेषण सत्ता के संरक्षण में पनपता अपराध और कराहता लोकतंत्र** यदि किसी आम नागरिक पर गंभीर आरोप लग जाएँ या उसे जेल जाना पड़े, तो वह चपरासी की नौकरी के लिए भी अयोग्य हो जाता है। लेकिन यही देश की सबसे बड़ी विडंबना है कि जिन पर हत्या, अपहरण, लूट, माफिया गतिविधियों जैसे संगीन आरोप हैं, वे खुलेआम सांसद, विधायक और मंत्री बनकर सत्ता का सुख भोगते हैं। सवाल उठता है—ऐसे में इस देश और लोकतंत्र का भला कैसे संभव है? बिहार की राजनीति में लंबे समय…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से विशेष रिपोर्ट | स्वास्थ्य–शिक्षा पर केंद्रित विश्लेषण देश में जाति और आरक्षण की राजनीति चाहे जितनी तेज़ हो, लेकिन एक सच्चाई ऐसी है जिसे कोई नकार नहीं सकता—जब बात जान बचाने की आती है, तो न जाति देखी जाती है, न आरक्षण। तब केवल एक ही सवाल बचता है—सबसे अच्छा डॉक्टर, सबसे अच्छा अस्पताल। हाल की घटनाएँ इस सच्चाई को आईना दिखाती हैं।जब ओमप्रकाश राजभर की तबीयत बिगड़ी, तो उत्तर प्रदेश के दर्जनों बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों को छोड़कर उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया—जिसे आज यूपी–एनसीआर…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से विशेष रिपोर्ट | वैचारिक विश्लेषण इतिहास गवाह है कि यदि दुनिया में सबसे अधिक संगठित, वैचारिक और संस्थागत नफ़रत किसी ने झेली है, तो वे हिंदू और यहूदी हैं। सवाल उठता है—आख़िर क्यों? यह नफ़रत केवल सड़कों या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की नामचीन यूनिवर्सिटियों और बौद्धिक मंचों तक में दिखाई देती है।Harvard University जैसी प्रतिष्ठित संस्था में फ़िलिस्तीन समर्थित आतंकी संगठनों को “फ्रीडम फाइटर” के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयास होते हैं, जबकि दूसरी ओर भारत में Jamia Millia Islamia और Jawaharlal Nehru University जैसे…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से बांग्लादेश में हिंदुओं की आज जो दयनीय स्थिति है, उसकी जड़ें 1971 के उसी निर्णायक दौर में छिपी हैं, जब इतिहास को नया मोड़ दिया जा सकता था। उस समय आयरन लेडी इंदिरा गांधी के समक्ष प्रख्यात मूर्तिकार और विचारक चितरंजन सुतार ने एक स्पष्ट मांग रखी थी—एक अलग बंगाली हिंदू राष्ट्र। परिस्थितियाँ ऐसी थीं कि यह मांग अव्यावहारिक नहीं थी, पर दुर्भाग्यवश इसे न तो राजनीतिक समर्थन मिला और न ही स्वयं बांग्लादेशी हिंदू समाज का संगठित साथ। समय बीतता गया, पर यह मांग पूरी तरह मरी नहीं। फिर 2003…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, मंडला I भोपाल (म.प्र.) अहमदपुर के ग्वारीटोला प्राथमिक शाला का वीडियो वायरल, नशे में पढ़ाते शिक्षक ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल मध्य प्रदेश के मंडला जिले की ग्राम पंचायत अहमदपुर स्थित ग्वारीटोला प्राथमिक शाला से सामने आया एक वीडियो राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है। वीडियो में शिक्षक महेश कुमार गोठरिया शराब के नशे में बच्चों को पढ़ाने के बजाय “तुम तो ठहरे परदेसी…” जैसे फिल्मी गीत सिखाते दिखाई दे रहे हैं। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में इसी स्कूल को लेकर यह खुलासा हुआ था…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियां, असामाजिक तत्व बेलगाम — सवर्ण आर्मी की दो टूक चेतावनी: “अब भी नहीं चेती सरकार तो हालात बेकाबू होंगे” सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर स्वयं को अधिवक्ता बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा बार-बार हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और समाज के कुछ वर्गों के विरुद्ध की जा रही अशोभनीय और उकसाने वाली टिप्पणियों ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में गंभीर आक्रोश पैदा कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो और बयानों के खुलेआम प्रसारित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस सरकारी कार्रवाई सामने नहीं…
भोपाल | बंजारी थाना क्षेत्र | 7:00 बजे सुबह ✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से भोपाल की पहचान बन चुकी सिक्स लेन कोलार रोड एक बार फिर रफ्तार की भेंट चढ़ गई। आज सुबह करीब 7 बजे, बंजारी थाना क्षेत्र के पास तेज रफ्तार एर्टिगा कार अनियंत्रित होकर सीधे डिवाइडर पर चढ़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए, सड़क पर मलबा बिखर गया और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं कि हादसा कितना भयावह था। गनीमत रही कि कार सवारों की जान बच गई, लेकिन उन्हें गंभीर…
