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- रफ़्तार का नशा और मौत की पार्टी: जब माता-पिता के अरमानों की जगह घर पहुँचती है ‘लाश’
Author: DR. MAHESH PRASAD MISHRA
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से **“MP में 27% OBC आरक्षण लागू — क्या संविधान से ऊपर उठ चुकी है सरकार? जातीय राजनीति की आग में जलता प्रदेश, जनता ने उठाए कड़े सवाल”** **“प्रदेश में जातीय विस्फोट! डॉ. विकास दुबे का आरोप—‘सरकार संवैधानिक व्यवस्था खत्म कर रही है, BJP को हटाना अब अनिवार्य’”** सवर्ण आर्मी का सीधा आरोप: “सरकार प्रदेश को जातीय आग में झोंक रही है”** मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की ताज़ा भर्ती में 27% OBC आरक्षण लागू कर दिया गया, जबकि 73% आरक्षण मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और कोई अंतिम फैसला…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से देश में एक गंभीर सवाल हवा में तैर रहा है—क्या सरकार निजी सेक्टर की मेरिट को भी राजनीतिक सौदों की भेंट चढ़ाने जा रही है? एक तरफ निजी कंपनियाँ—Adani, Ambani, Tata, Birla जैसी—दुनिया के बाजारों में भारत का परचम लहरा रही हैं,तो दूसरी तरफ सरकारी कंपनियाँ इतनी तेजी से गिर रही हैं कि लगता है जैसे किसी ने जानबूझकर इन्हें डूबने दिया हो। कारण साफ है:जहाँ प्राइवेट सेक्टर में काबिलियत ही टिकट है,वहीं सरकारी तंत्र में काबिलियत से ज्यादा पहचान और राजनीति चलती है। अब निजी कंपनियों पर भी ‘नीतिगत हमला’?…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से मध्य प्रदेश में क़ानून, शासन और प्रशासन एक बार फिर सवालों के घेरे में है। क्योंकि ब्राह्मण समाज की बेटियों का अपमान करने वाले, फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे IAS बने संतोष वर्मा पर आज तक एक भी कठोर कार्रवाई नहीं हो पाई। लेकिन अब मामला दबने वाला नहीं—क्योंकि सवर्ण आर्मी का दबाव तेज़ी से बढ़ रहा है।सरकार को झकझोरने के बाद मिली पहली आधिकारिक कार्रवाई**सवर्ण आर्मी दतिया जिलाध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र के बाद, आज Chief Secretary श्री अनुराग जैन ने आगे कदम बढ़ाते हुए शिकायत को PSGAD (सामान्य प्रशासन विभाग)…
(अख़बार की कटिंग व उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए सभी बिंदुओं के आधार पर) जयपुर।भोपालI✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से राजस्थान हाईकोर्ट के एक हालिया आदेश ने पूरे देश में तीखी बहस छेड़ दी है। अदालत ने कहा है कि यदि लड़का-लड़की बालिग होने की कगार पर हैं, पर विवाह-योग्य आयु नहीं पहुँची, तब भी वे अपनी मर्जी से ‘लिव-इन रिलेशन’ में रह सकते हैं—और किसी को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। जहाँ एक ओर केंद्र व राज्य सरकारें बाल-विवाह पर सख़्त प्रतिबंध को लेकर बड़े-बड़े अभियान चलाती हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायालय का यह निर्णय समाज…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्र की कलम से, भोपाल (म.प्र.) देवास में हुए मामले ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित का तत्काल निलंबन सराहनीय कदम माना जा सकता है, परंतु इससे एक और कड़वी सच्चाई भी उजागर होती है—क्या प्रदेश की वर्तमान सरकार कार्रवाई भी जातिगत चश्मे से देखकर कर रही है? 8 नवंबर को शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना द्वारा आत्महत्या और फिर 5 दिसंबर को वायरल हुए वीडियो में लगाए गए आरोपों के बाद…
भोपाल।✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से: जब किसी देश के विदेश मंत्री खुद मंच पर खड़े होकर यह सीख देने लगें कि “टैलेंट को मत रोको, नहीं तो नुकसान करोगे”, तब समझ लीजिए कि देश में हालात कितने ‘आदर्श’ होंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी का ताज़ा बयान पढ़कर पहले तो लगा कि इतना पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी देश के साथ इतना बड़ा मज़ाक कर सकता है? लेकिन फिर सोचा—बेचारा करे भी तो क्या? राजनीति है, सब कुछ करवा लेती है। देश के भीतर टैलेंट की जो हालत है, उसकी बात करने की बजाय मंचों पर जाकर दुनिया…
More context is being compiled from the provided extract; details may be updated. Rahul Rawail’s thriller can be rented from YouTube Movies and Apple TV+. ‘Why the Poor Don’t Kill Us’ is essential Manu Joseph, complete with hits and misses Ramachandra Guha: It’s time for the Indian cricket board to treat South Africa with greater respect ‘The Unbroken Coast’ by Nalini Jones: A Bandra novel about family, friendship, and shared history AI won’t replace workers – but those with leadership skills and empathy will become more valuable Food courts, air-conditioned bazaars: Santosh Desai on how the street is receding from…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से देश की राजनीति अब उस मोड़ पर पहुँच चुकी है जहाँ सड़कें भी धर्म और दिखावे की प्रयोगशाला बन चुकी हैं।कभी किसी नेता को सड़क पर कांवड़ दिखती है, तो कोई उसे नमाज का मंच बना देना चाहता है। मज़े की बात यह है कि दोनों ही यह भूल जाते हैं —सड़कें पूजा या प्रदर्शन के लिए नहीं, चलने और जोड़ने के लिए होती हैं। नगीना के सांसद चंद्रशेखर ने कहा — “जब कांवड़ के लिए सड़कें बंद हो सकती हैं, तो नमाज के लिए आधा घंटा क्यों नहीं?”उनके जवाब में…
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल की कलम से कभी इतिहास से सीख लेने की बात करने वाले नेता,अब इतिहास को अपने भाषणों की कहानी बना चुके हैं।कभी जो घटनाएँ हमें जोड़ने के लिए थीं,वो अब वोट बैंक के हिसाब से तोड़ी-मरोड़ी जा रही हैं। सत्ताधारी वर्ग ने अपने चतुर शब्दों से जनता को फिर से वही दिखाया —कि असली समस्या बेरोज़गारी, महँगाई या शिक्षा नहीं,बल्कि “कौन कौन था” और “कौन कौन बन गया” है। आज का नागरिक खुद से पूछे —इतिहास में कौन जीता, कौन हारा, इससे देश नहीं चलता;देश तब चलता है जब वर्तमान सच बोलने की हिम्मत…
