मेरठ। सेक्टर-12 स्थित ग्रैंड स्क्वायर कॉम्प्लेक्स में आवास एवं विकास परिषद द्वारा की गई सीलिंग कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। व्यापारियों ने विभागीय अधिकारियों पर अवैध निर्माण को बढ़ावा देने और बाद में सीलिंग के नाम पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
क्या है मामला?
व्यापारियों का कहना है कि निर्माण के समय विभागीय स्तर पर कोई रोक नहीं लगाई गई, लेकिन बाद में कार्रवाई करते हुए कॉम्प्लेक्स को सील कर दिया गया। इससे दुकानदारों का लाखों रुपये का माल अंदर ही फंस गया है।
कॉम्प्लेक्स में हाल ही में एक ज्वैलरी शोरूम के उद्घाटन के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे मामला और चर्चा में आ गया।
कॉम्प्लेक्स और दस्तावेजों की स्थिति
जानकारी के अनुसार, सेक्टर-12 स्थित भूखंड संख्या 427 और 428 को मिलाकर करीब 773 वर्ग मीटर में चार मंजिला कॉम्प्लेक्स बनाया गया है, जिसमें लगभग 115 दुकानें हैं।
भूमि के मूल आवंटी कस्तूरी लाल ने यह संपत्ति सईद सैफी को बेची थी, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं कराया गया था। इसके आधार पर विभाग ने नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई।
व्यापारियों का पक्ष
व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने दुकानों में भारी निवेश किया है और कई दुकानदार किराए पर कारोबार कर रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि उनके पास बिजली कनेक्शन, जीएसटी पंजीकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं।
उनका कहना है कि यदि निर्माण अवैध था, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई।
प्रबंधन का पक्ष
दूसरी ओर, सईद सैफी का कहना है कि उनके पास फायर विभाग को छोड़कर सभी आवश्यक विभागों की एनओसी मौजूद है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई पर उन्हें आपत्ति है और वे कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
आगे की स्थिति
सीलिंग कार्रवाई के बाद व्यापारियों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध की चेतावनी दी है। फिलहाल मामला विभागीय स्तर पर विचाराधीन है।