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500 साल पुराना "ज़ोहरा बाग़ " बदहाल

By JAHID KHAN • 2026-10-08 10:52 • 25 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
500 साल पुराना "ज़ोहरा बाग़ " बदहाल

आगरा: 500 साल पुराना 'ज़ोहारा बाग' बदहाल! ₹60 लाख स्वीकृत होने के 2 साल बाद भी कागज़ों में अटका ASI का काम!

आगरा में मुगलकालीन स्थापत्य कला का नायाब नमूना और इतिहास के पन्नों में दर्ज 'ज़ोहारा बाग' (Zohra Bagh) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की कथित उपेक्षा और धीमी कार्यप्रणाली के चलते बदहाली की स्थिति में पहुंच गया है। यमुना किनारे चीनी का रोज़ा के ठीक पास स्थित यह 500 साल पुराना स्मारक बीते दो वर्षों से अपनी बदहाली और जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा कर रहा है। एएसआई द्वारा इसके संरक्षण के लिए दावे किए गए हैं, लेकिन धरातल पर काम की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है।

अक्तूबर 2024 में ढह गई थीं तीन मंजिलें:
उल्लेखनीय है कि अक्तूबर 2024 में हुई मूसलाधार बारिश के दौरान लाल बलुआ पत्थर से बने इस ऐतिहासिक स्मारक का लगभग तीन-चौथाई (3/4) हिस्सा ढह गया था। तीन मंजिलों के ढहने के बाद तत्कालीन समय में एएसआई की टीम ने मलबा हटाकर उखड़े हुए पत्थरों को मसाले से व्यवस्थित किया था। हादसे के बाद से ढही हुई तीनों मंजिलों के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का काम लंबित है।

₹60 लाख का बजट मंजूर, लेकिन काम कागज़ी प्रक्रिया में:
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, ज़ोहारा बाग के पहले चरण के संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य के लिए एएसआई मुख्यालय द्वारा लगभग ₹60 लाख की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। बजट मंजूर होने के बावजूद दो सालों में विभाग की ओर से पत्राचार और कागजी प्रक्रिया जारी रही है। इसके अलावा, बाढ़ के समय चीनी का रोज़ा से ज़ोहारा बाग तक सामग्री पहुंचाने के लिए बनाया गया पाथवे भी क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसे अब तक दुरुस्त नहीं किया गया है।

3D स्कैनिंग के चलते बीते दो साल:
संरक्षण कार्य में हो रही देरी के पीछे एएसआई अधिकारियों का तर्क है कि उनके पास ज़ोहारा बाग की गिरी हुई तीनों मंजिलों का कोई विस्तृत स्थापत्य ब्योरा या मूल नक्शा मौजूद नहीं था। केवल तस्वीरों के आधार पर पुनर्निर्माण करना जोखिम भरा था। इसलिए स्मारक की सटीक संरचना समझने के लिए आधुनिक 3D स्कैनिंग कराई गई, जिसमें काफी समय लगा। हालांकि, स्थानीय इतिहास प्रेमियों और नागरिकों का कहना है कि एएसआई की धीमी कार्यशैली के कारण आगरा की एक और अनमोल धरोहर का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।

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