आगरा में भारी वाहनों से मौतो का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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आगरा में भारी वाहनों से मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: 400 करोड़ का बाईपास बनने के बाद भी शहर में घुस रहे ट्रक; केंद्र, NHAI और UPEDA को नोटिस..आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर भारी वाहनों से हो रही सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शुक्रवार को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने अदालत का ध्यान आगरा की गंभीर समस्या की ओर दिलाया। उन्होंने बताया कि आगरा का उत्तरी बाइपास करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनकर चालू हो चुका है, लेकिन जिन भारी वाहनों का आगरा में कोई गंतव्य नहीं है, वे अब भी शहर के बीच से गुजर रहे हैं।
इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEDA) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।
क्यों बन रही है मौतों की वजह?
आवेदन के अनुसार, NH-19 घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरता है। इसके दोनों ओर आवासीय कॉलोनियां, स्कूल, अस्पताल, बाजार और ऐतिहासिक स्मारक हैं। सिकंदरा, खंदारी, भगवान टाकीज, रामबाग और ट्रांस यमुना में भारी वाहनों के साथ स्थानीय यातायात भी चलता है। आवेदन में कई जानलेवा दुर्घटनाओं का उल्लेख किया गया है। आठ जनवरी 2026 को विजय नगर कॉलोनी के पास ट्रक झोपड़ी पर पलटने से तीन लोगों की मौत हुई थी। 15 जनवरी को सिकंदरा के पास ट्रक की टक्कर से दो लोगों की मौत हुई थी।
टोल के चक्कर में शहर से गुजरते हैं वाहन
आगरा उत्तरी बाइपास 14 किलोमीटर लंबा है और चार दिसंबर 2025 से चालू है। यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़कर यह शहर के बाहर से लगभग 38 किलोमीटर का वैकल्पिक मार्ग देता है, जबकि शहर के भीतर का मार्ग करीब 34 किलोमीटर है। यानी भारी वाहनों को बाइपास से जाने पर लगभग चार किलोमीटर अतिरिक्त चलना होगा। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि बाइपास और यमुना एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग टोल के कारण वाहन अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए शहर के भीतर से जाते हैं।
क्या मांग की गई है?
केसी जैन ने टोल व्यवस्था तर्कसंगत बनाने, प्राधिकरणों में समन्वय, सरकारी अधिसूचना, स्पष्ट संकेतक और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अन्य शहरों में भी बाइपास से भारी वाहनों को निकालने की व्यवस्था लागू करने की अपील की, ताकि दुर्घटनाओं, जाम, वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आ सके।