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आगरा में जलकल विभाग का बड़ा घोटाला

By JAHID KHAN • 2026-10-08 07:18 • 18 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
आगरा में जलकल विभाग का बड़ा घोटाला

आगरा ब्रेकिंग न्यूज़: जलकल विभाग में कथित अनियमितताओं का मामला, कोर्ट के आदेश पर ठेकेदार समेत 5 के खिलाफ FIR दर्ज

आगरा जलकल विभाग से जुड़े एक गंभीर मामले में न्यायालय के आदेश पर छत्ता थाने में ठेकेदार रवि लवानिया समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जलकल विभाग, नगर निगम के पंप हाउस अधीक्षक सुमित पचौरी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाने और धमकी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

नामजद आरोपी

एफआईआर में नामजद आरोपियों में रवि लवानिया, मनीष कुमार उर्फ मंशा, आसिफ, सचिन वशिष्ठ और अतुल शर्मा शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी अभिलेखों में गलत प्रविष्टियां कराने और तैयार किए गए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए उन पर दबाव बनाया।

मई 2026 में हुआ था विवाद

सुमित पचौरी की शिकायत के मुताबिक, मई 2026 में कथित तौर पर सरकारी दस्तावेजों में गलत प्रविष्टियां की गई थीं। इन प्रविष्टियों से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि नियमों के विपरीत होने के कारण उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें नौकरी से हटाने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दिए जाने का आरोप है। शिकायत में दबाव बनाने के लिए व्हाट्सऐप पर तस्वीरें और धमकी भरे संदेश भेजे जाने की बात भी कही गई है।

करोड़ों रुपये की हेराफेरी और फर्जी प्रमाणपत्रों के आरोप

शिकायत में सरकारी कार्यों और दस्तावेजों से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की बात कही गई है। पंप हाउस अधीक्षक का आरोप है कि उन्हें भी कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव में लेने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं।

न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

शिकायतकर्ता द्वारा न्यायालय का रुख किए जाने के बाद अदालत के आदेश पर छत्ता थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, सरकारी दस्तावेजों, कथित गलत प्रविष्टियों, व्हाट्सऐप संदेशों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी। करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी और फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े आरोपों की भी जांच होगी।

मामले में नामजद आरोपियों की भूमिका और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, इस मामले ने जलकल विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी दस्तावेजों में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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