आगरा नगर निगम में 12 की मंजूरी पर चल रही 37 किराए की कारे
Agra News: आगरा नगर निगम में 12 की मंजूरी पर चल रहीं 37 किराए की कारें, नगर आयुक्त ने एक्स्ट्रा बिल रोके
आगरा नगर निगम में जनता के टैक्स के पैसों पर अफसरों द्वारा लग्जरी गाड़ियां दौड़ाने और मनमाने बिल बनाने का बड़ा मामला सामने आया है। नगर निगम में जहाँ एक तरफ निर्माण कार्यों के लिए बजट का अभाव बताकर टेंडर रोके गए हैं, वहीं दूसरी तरफ छोटे-छोटे पदों पर बैठे अधिकारी भी किराए की लग्जरी कारों में घूम रहे हैं। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्वीकृति से तीन गुना अधिक गाड़ियां किराए पर ली गई हैं और हर महीने लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।
12 की अनुमति, लेकिन दौड़ रहीं 37 लग्जरी कारें:
नगर निगम नियमावली के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न विभागों के लिए अधिकृत रूप से केवल 12 गाड़ियां ही टैक्सी के तौर पर किराए पर ली जा सकती हैं। लेकिन निगम प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर 37 लग्जरी गाड़ियां (जैसे इनोवा क्रिस्टा, होंडा सिटी, स्विफ्ट डिजायर) किराए पर ले रखी हैं। इनमें विज्ञापन विभाग, पर्यावरण अभियंता, वृक्षारोपण कार्यक्रम, केयर टेकर, कर निर्धारण अधिकारी, सचिवालय और जेडएसओ जैसे विभागों में 25 अतिरिक्त कारें चलाई जा रही हैं। इस पर हर महीने लगभग 16.02 लाख रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है।
2500 किमी एक्स्ट्रा चलाने का खेल, ढाई गुना वसूला जा रहा किराया:
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू गाड़ियों की फर्जी रनिंग और एक्स्ट्रा बिलिंग है। आगरा शहर का दायरा करीब 20 से 30 किलोमीटर क्षेत्र में सीमित है, लेकिन कई अफसरों और केयर टेकरों की गाड़ियों को महीने में 1500 से 2500 किलोमीटर अतिरिक्त चला हुआ दर्ज किया जा रहा है। इसका मतलब यह निकाला जाए तो रविवार की छुट्टियां हटाकर भी हर अधिकारी रोजाना 100 से 250 किलोमीटर शहर में ही घूम रहा है। इस एक्स्ट्रा किलोमीटर और अतिरिक्त घंटों के नाम पर वेंडरों को 74,933 रुपये तक का एक्स्ट्रा भुगतान (तय रेट से ढाई गुना ज्यादा) किया जा रहा है।
पार्षदों ने खोला मोर्चा, नगर आयुक्त ने लगाई भुगतान पर रोक:
इस फिजूलखर्ची पर पार्षदों ने सदन में सवाल उठाकर अफसरों की मॉनिटरिंग और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। पीपलमंडी से पार्षद रवि माथुर ने कहा कि जब शहर ही छोटा है तो अधिकारी हर दिन 200 किलोमीटर कहां घूम रहे हैं? राजनगर पार्षद बंटी माहौर ने कहा कि चार-चार अधिकारी निरीक्षण के नाम पर कारें लेकर घूम रहे हैं, जबकि सफाई और मॉनिटरिंग का कोई नतीजा धरातल पर नहीं दिख रहा।
मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि जैसे ही यह अनियमितता उनके संज्ञान में आई, उन्होंने तत्काल प्रभाव से एक्स्ट्रा किलोमीटर और अतिरिक्त घंटों के भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि पुराने सभी बिलों की गहनता से जांच कराई जा रही है और भविष्य में किसी भी वेंडर को अतिरिक्त समय व दूरी के नाम पर बिना ठोस साक्ष्य के भुगतान नहीं किया जाएगा।